गर्भवती को जमानत मानवीय आधार पर जरूरी, हिरासत जच्चा-बच्चा दोनों के लिए सही नहीं
-गर्भावस्था में स्वास्थ्य जोखिम और जटिलताओं की संभावना, हिरासत से बढ़ता है तनाव
-हत्या के मामले में गर्भवती महिला को 3 माह की अंतरिम जमानत पर रिहा करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हत्या के मामले में आरोपी महिला को उसके गर्भ के आधार पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन माह की अंतरिम जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि गर्भावस्था में स्वास्थ्य जोखिमों और जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है और हिरासत में रहने से तनाव का स्तर बढ़ सकता है, जो मां और अजन्मे बच्चे दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। पानीपत निवासी वर्षा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने गर्भ का हवाला देते हुए जमानत देने की मांग की थी। याची ने बताया कि 5 जुलाई 2023 को दर्ज हत्या के मामले में आरोपी है। हाईकोर्ट ने मामले में सरकार से जवाब मांगा तो सरकार ने कहा कि सभी स्वास्थ्य सेवाएं जेल में याची को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को अंतरिम जमानत देना मानवीय आधार पर जरूरी है क्योंकि गर्भावस्था विभिन्न स्वास्थ्य जोखिमों और जटिलताओं की संभावना बढ़ा देती है। इसके अलावा, गर्भवती होने पर हिरासत में रहने से तनाव का स्तर बढ़ सकता है, जो मां और अजन्मे बच्चे दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके साथ ही अजन्मे बच्चे की भलाई अदालत के लिए सर्वोपरि चिंता का विषय है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए याचिकाकर्ता को जमानत दे दी है।