हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में बुधवार को चंडीगढ़ में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पंचायती राज संस्थानों में पिछड़ा वर्ग (ए) के राजनीतिक आरक्षण अधिकारों को सुनिश्चित करने के संबंध में हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को स्वीकृति प्रदान की गई। रिपोर्ट में पिछड़ा वर्ग ब्लॉक-ए (बीसी-ए) के लोगों को राजनीतिक सेटअप में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने के कारण उन्हें पंचायती राज संस्थानों में राजनीतिक आरक्षण प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
हालांकि, आयोग ने केवल पंचायती राज संस्थानों में ऐसा प्रावधान किए जाने के लिए पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के अनुपात की ही सिफारिश की है, इसलिए संबंधित विभाग किसी भी स्तर पर पिछड़े वर्ग (ए) के लिए आरक्षित की जाने वाली सीटों के रोटेशन को तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
ग्राम पंचायत में अनुशंसित आरक्षण
आयोग ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंच का पद पिछड़ा वर्ग (ए) के लिए आरक्षित किए जाने की सिफारिश की है और इस प्रकार उस ग्राम सभा क्षेत्र की कुल आबादी में पिछड़ा वर्ग (क) की आबादी के आधे प्रतिशत के रूप में ग्राम पंचायत की सीटों की कुल संख्या के उसी अनुपात में आरक्षित की जाएगी। यदि डेसिमल वैल्यू 0.5 या अधिक है तो इसे अगले उच्च पूर्णांक में पूर्णांकित किया जाएगा।
यह है आरक्षण का फार्मूला
यदि पिछड़े वर्ग (ए) की आबादी सभा क्षेत्र की कुल आबादी का दो प्रतिशत या अधिक है तो प्रत्येक ग्राम पंचायत में पिछड़े वर्ग (ए) से संबंधित कम से कम एक पंच होगा। इसी प्रकार, एक ब्लॉक में सरपंच के पदों की कुल संख्या का आठ प्रतिशत पिछड़ा वर्ग (ए) के लिए आरक्षित होगा।
पंचायत समिति में अनुशंसित आरक्षण
प्रत्येक पंचायत समिति में सदस्य के पद पिछड़े वर्ग (ए) के लिए आरक्षित होंगे और इस प्रकार ब्लॉक की कुल आबादी में पिछड़े वर्ग की आबादी के आधे प्रतिशत के रूप में पंचायत समिति में सीटों की कुल संख्या उसी अनुपात में आरक्षित होंगी। यदि डेसिमल वैल्यू 0.5 या अधिक है तो इसे अगले उच्च पूर्णांक में पूर्णांकित किया जाएगा।
जिला परिषद में अनुशंसित आरक्षण
प्रत्येक जिला परिषद में सदस्य के पद पिछड़े वर्गों (ए) के लिए आरक्षित होंगे और इस प्रकार आरक्षित सीटों की संख्या, जिला परिषद क्षेत्र की कुल आबादी में पिछड़े वर्ग की आबादी के आधे प्रतिशत के रूप में जिला परिषद में सीटों की कुल संख्या उसी अनुपात में आरक्षित होंगी।आरक्षण अनुसूचित जाति और बीसी (ए) के पक्ष में आरक्षित कुल सीटों के कुल 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।