बात 3 सितंबर 1708 की है। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह नांदेड़ गए। वहां पर माधो दास बैरागी का आश्रम देखा और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें सिख बनाकर उनका नाम बंदा सिंह रख दिया।
टैगोर थिएटर में वीरवार को आयोजित लाइट साइट एंड साउंड प्ले बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन दिखाया गया।
इस नाटक को डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स और पंजाबी कला केंद्र ने मिलकर करवाया था। नाटक के दूसरे सीन में मुगलों के साथ बंदा सिंह बहादुर के युद्धों को दिखाया गया। नाटक का अंत बादशाह फर्रुखशियर के आदेश पर बंदा सिंह बहादुर की शहादत से होता है। एसके पुनिया द्वारा निर्देशित यह नाटक एक घंटे और पैंतालीस मिनट का था। इसमें बलकार सिंह सिद्धु, अमरीश नागपाल, शम्मी खालसा, तेजभान गांधी, वरुण नारंग, रवनीत कौर और हरप्रीत कौर जैसे कलाकारों ने अपने अभिनय से तालियां बटोरीं।