चंडीगढ़। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी रोकथाम जरूरी है। इसके लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। सभी को इसके लिए अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करके उसे सबको बताने की जरूरत है। ऐसे कार्यक्रम के जरिये डराया नहीं जा रहा है, बस जागरूकता के लिए यह कार्यक्रम होते हैं और होने चाहिए। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल पीयू के डॉ. बीआर अंबेडकर सेंटर व पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से शनिवार को पीयू में क्लाइमेट इमरजेंसी पर आयोजित नेशनल सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, हम अपने सुख के लिए कंपीटीशन कर रहे हैं, लेकिन इससे खुशी नहीं मिल सकती। प्रकृति को बचाना जरूरी है, इसलिए यह देखें कि प्रकृति से हमें क्या मिला और हम उसे क्या दे रहे हैं। पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा, पर्यावरण संरक्षण पर पीयू काम कर रहा है। हरियाली के लिए हजारों पेड़ लगाए गए और उनकी सुरक्षा की जा रही है। युवाओं को भी कार्यक्रमों के जरिये जागरूक किया जा रहा है।
देश को प्रशासक नहीं पर्यावरण प्रबंधक की जरूरत : प्रो. मरवाह
निंबुआ ग्रीन फील्ड पंजाब लिमिटेड के एग्जूकेटिव डायरेक्टर आरएन जिंदल ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के लिए सभी को मिलजुलकर और तेजी से काम करना होगा, तभी प्रदूषण के खिलाफ चलने वाली मुहिम कामयाब हो सकेगी। पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन प्रो. एसएस मरवाह ने कहा, पराली जलाने के कई केस सामने आ रहे हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इसको वैज्ञानिक तरीके व जागरूकता के जरिये रोका जाना चाहिए। इसके लिए युवा लीडर बनें और एनएसएस के स्वयंसेवकों को अंबेसडर बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान घरों से निकाला जाना चाहिए। घर के किचन से गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग करें। उन्होंने कहा, देश को प्रशासक की नहीं पर्यावरण प्रबंधक की जरूरत है। समन्वयक प्रो. देविंदर सिंह ने पूरे कार्यक्रम पर प्रकाश डाला और ऐसे सेमिनार की जरूरतों पर बात की। जस्टिस जसबीर सिंह, पूर्व मुख्य सचिव पंजाब सुबोध अग्रवाल, पूर्व मुख्य सचिव हरियाणा उर्वशी गुलाटी, परमजीत आदि ने विचार रखे। समन्वयक प्रो. देविंदर सिंह ने सभी का आभार जताया।