गमाडा ने मंगलवार को इको सिटी-2 और इको सिटी एक्सटेंशन के लिए एक्वॉयर की जा रही जमीन का अवार्ड घोषित किया।
इस दौरान किसानों को एक एकड़ जमीन के बदले 2 करोड़ तीन लाख रुपये दिए जाएंगे। साथ ही लैंड पूलिंग का ऑप्शन भी दिया गया है। जबकि किसानों ने गमाडा द्वारा सुनाए गए अवार्ड का विरोध किया।
किसानों की दलील थी कि एक जनवरी 2014 से नया जमीन अधिग्रहण कानून लागू हो जाएगा। ऐसे में नया कानून लागू होने से एक दिन पहले अवार्ड घोषित कर गमाडा ने किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान किया है।
गमाडा द्वारा इकोसिटी-2 के लिए 306 एकड़ व इको सिटी एक्सटेंशन के लिए 98 एकड़ जगह एक्वॉयर की जानी है। यह सारी जगह गांव होशियारपुर में ही पड़ती है।
साल के आखिरी दिन मंगलवार को गमाडा मैनेजमेंट ने एक्वॉयर की जाने वाली जमीन का अवार्ड घोषित किया। अवार्ड कमेटी रूम में सुनाया गया।
अवार्ड सुनने के लिए काफी संख्या में इलाके के किसान पहुंचे हुए थे। उन्होंने गमाडा द्वारा घोषित किए अवार्ड का विरोध जताया। किसानों की दलील थी कि अधिकारियों ने उनकी एक भी नहीं सुनी।
किसान साधू सिंह, जगतार सिंह, हरजिंदर सिंह व जसविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें गमाडा द्वारा सुनाया गया अवार्ड मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा सौ साल पहले बने कानून के हिसाब से गमाडा जमीन की कीमत तय कर हा है।
वे गमाडा द्वारा दी जाने वाली राशि नहीं उठाएंगे। वहीं, जरूरत पड़ी तो मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जाएंगे। वहीं, गमाडा के ईओ व लैंड एक्विजीशन अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि नियमों के मुताबिक ही सारी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि तय टाइम पर अवार्ड सुनाया गया है। किसानों को जमीन का दस प्रतिशत अधिक दाम इसलिए दिया जा रहा है कि वे कोर्ट न जाए।
क्या हैं लैंड पूलिंग ऑप्शन
लैंड पूलिंग ऑप्शन में किसान जमीन के पैसे न लेकर बदले में जमीन ले सकता है। इसके तहत जमीन मालिकों को रेजिडेंशिल प्लॉट और कॉमर्शियल जगह अलॉट की जाती है। एक्वॉयर की जाने वाली जमीन के हिसाब से सारी कार्रवाई होती है।
सड़क की जमीन से भी कम मुआवजा मिला
जानकारी के मुताबिक गमाडा ने कुछ समय पहले 200 फुट चौड़ी सड़क के लिए जमीन एक्वॉयर की थी। उस समय किसानों को कम मुआवजा मिला था।
उसके बाद किसानों ने कोर्ट की शरण ली। अदालत के आदेश पर उन्हें 2.37 करोड़ मुआवजा दिया गया था। लेकिन यह राशि उससे भी कम है।