प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थिति भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय ‘कृषि उन्नति मेला’ में वर्ष 2014-15 में धान की श्रेणी में उत्पादन करने के लिए हरियाणा को ‘कृषि कर्मण पुरस्कार’ प्रदान किया। यह पुरस्कार हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल व प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने प्राप्त किया। इस पुरस्कार में एक ट्राफी, प्रशस्ति पत्र और दो करोड़ रुपए की नकद राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त, प्रगतिशील किसानों के लिए हरियाणा के दो कृषकों को ‘कृषि मंत्री का कृषि कर्मण’ पुरस्कार वर्ष 2014-15 भी प्रदान किया गया। हिसार जिले के बीड़ बबरान गांव के कृषक शमशेर सिंह और यमुनानगर जिले की हरेवा गांव की किसान सोना देवी को इस पुरस्कार से नवाजा गया। इस पुरुस्कार में कृषक को दो लाख रुपए की नकद राशि और एक प्रशस्ति पत्र पुरस्कार स्वरूप दिया गया। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वर्ष 2014-15 के लिए धान में सर्वश्रेष्ठ ‘कृषि कर्मण पुरुस्कार’ के लिए प्रदेश के मेहनती किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के किसानों ने धान के उत्पादन और उत्पादकता में जो शानदार प्रदर्शन किया है वह अपने आप में एक कीर्तिमान है।
उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार का श्रेय हरियाणा के मेहनतकश किसानों को जाता है। उनके परिश्रम से हरियाणा आज धान के उत्पादन में एक अग्रणी राज्य है। उन्होंने किसानों को तकनीक सहायता एवं सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रदेश के कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मृदा स्वास्थ्य, ग्राम स्तर पर मिट्टी उत्पादकता संबंधी विवरण तैयार करना, जल प्रबंधन, धान के प्रमाणित बिजों का शत-प्रतिशत उपचार, संसाधनों को बचाने के लिए तकनीक को बढ़ावा देना, बड़ी मात्रा में पुराने बिजों की जगह नए बिजों की उपलब्धतता करवाना इत्यादि जैसे उपायों से वर्ष 2014-15 के दौरान राज्य में धान के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से हरियाणा कृषि के क्षेत्र में और उपलब्धियां प्राप्त करेगा।
हरियाणा में लगातार बढ़ा चावल का उत्पादन
वर्ष 2014-15 के दौरान हरियाणा में 40.06 लाख टन चावल का अधिकतम उत्पादन किया गया जबकि वर्ष 2013-14 में प्रदेश में 39.98 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था। हरियाणा में चावल उत्पादन की अधिकतम वृद्धि के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। मृदा उर्वरता मानचित्रों के आधार पर पोषक तत्वों में कमी वाले ग्रामों में विशेष फोकस दिया गया।
सिंचाई जल बचत के लिए सीधे धान की बुवाई लाईन में को बढावा दिया गया। चावल उत्पादन के लिए जिसमें बासमती भी शामिल है, पर विशेष दिया गया। धान के लिए बीज प्रतिस्थापन दर 30.37 प्रतिशत के स्तर तक बढाया गया। किसानों को यंत्रीकरण संवर्धन जैसे लेजर लैंड लेवलर, सीड-ड्रिल, स्ट्रा-रीपर इत्यादि दिया गया। मृदा स्वास्थ्य सुधारने हेतु हरी खाद को बढ़ावा दिया गया और प्रत्येक ब्लाक में प्रशिक्षण कैम्पों एवं एक्सपोजर दौरों को प्रोत्साहित किया गया।