फेडरेशन ऑफ चंडीगढ़ रीजन ऑटोमोबाइल डीलर्स ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 2022 की इलेक्ट्रिक वाहन नीति और उसके बाद 7 जुलाई, 2023 और 18 अक्तूबर, 2023 के संशोधनों को रद्द करने करने की मांग की है। त्योहारी सीजन में गैर ईवी वाहनों के पंजीकरण के अभाव में बिक्री न होने के चलते हो रहे घाटे की दलील के बावजूद हाईकोर्ट ने उन्हें बिना कोई राहत दिए याचिका पर सुनवाई 9 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।
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याचिकाकर्ता ने दलील दी कि भारत सरकार के निर्देशों पर चंडीगढ़ प्रशासन ने 2022 में नीति जारी की थी। याची ने कहा कि केंद्र के दिशा निर्देश गैर ईवी वाहनों के पंजीकरण पर रोक से जुड़े नहीं थे बल्कि यह प्रोत्साहन के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के संबंध में थे। इसमें मौद्रिक लाभ के साथ-साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना आदि भी शामिल है। इसके स्थान पर प्रशासन वाहनों के पंजीकरण की सीमा तय कर रहा है जो चंडीगढ़ के भीतर काम करने वाले डीलरों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है।
चंडीगढ़ प्रशासन की खुद की रिपोर्ट के अनुसार शहर में आने वाले 50 प्रतिशत से अधिक वाहन पड़ोसी राज्यों से हैं और आसपास के किसी भी क्षेत्र खास तौर पर पंचकूला और मोहाली में इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है। इस प्रकार की नीति किसी भी तरह से उस उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगी जो इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के संबंध में हासिल करना चाहते हैं। हाईकोर्ट को याची ने बताया कि त्योहार के सीजन में बड़ी संख्या में लोगों ने गैर-इलेक्ट्रिक वाहनों की बुकिंग की हैं लेकिन प्रशासन की नीति के चलते उनकी डिलीवरी लंबित है। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा अपनाई गई नीति, प्रक्रिया और आधार पूरी तरह से मनमाना है और प्रशासन को गैर-पंजीकरण के कारण कर और अन्य राजस्व का नुकसान हो रहा है। याची ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन के बिना कार्यकारी निर्देश से वाहनों की बिक्री और पंजीकरण को प्रतिबंधित नहीं कर सकते हैं।