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ऑडिट ने खोली पोल: सेक्टर 43 में बन रही 41 करोड़ की पार्किंग अधूरी, न जुर्माना लगाया और न जवाबदेही तय की

Fri, 24 Oct 2025 04:00 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से हंसराज कोहली एंड कंपनी को यह प्रोजेक्ट अलॉट किया गया था। सितंबर 2022 में शुरू हुआ यह काम दो साल में पूरा होना था यानी सितंबर 2024 तक लेकिन ऑडिट में खुलासा हुआ कि अब तक यह काम पूरा नहीं हुआ है।
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अधूरी पड़ी सेक्टर-43 में बन रही पार्किंग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ सेक्टर-43 में जिला अदालत और ज्यूडिशियल अकादमी के पास बन रही मल्टी लेवल पार्किंग परियोजना पर ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर लापरवाहियां उजागर की हैं। 

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करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट सितंबर 2024 तक पूरा होना था लेकिन अब तक अधूरा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकेदार ने न सिर्फ एग्रीमेंट की कई शर्तों का पालन नहीं किया बल्कि विभाग ने भी न कोई जुर्माना लगाया, न जवाबदेही तय की।

ऑफिस ऑफ डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट (सेंट्रल) चंडीगढ़ ने यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के कैपिटल प्रोजेक्ट डिविजन-6 का ऑडिट किया है जिसमें सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत और ज्यूडिशियल अकादमी के पास बन रही मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। 
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करीब 41 करोड़ रुपये की लागत से हंसराज कोहली एंड कंपनी को यह प्रोजेक्ट अलॉट किया गया था। सितंबर 2022 में शुरू हुआ यह काम दो साल में पूरा होना था यानी सितंबर 2024 तक लेकिन ऑडिट में खुलासा हुआ कि अब तक यह काम पूरा नहीं हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकेदार को एग्रीमेंट के अनुसार एक इंटीग्रेटेड प्रोग्राम चार्ट तैयार करना था जिसमें कार्य की गतिविधियां, मैन पावर, मशीनरी, मटेरियल की खरीद और अन्य जानकारी दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन न तो ठेकेदार ने ऐसा चार्ट तैयार किया और न ही विभाग ने इस पर कोई आपत्ति जताई।

डीएनआईटी कंडीशन तोड़े, फिर भी चुप्पी साधे रहे अधिकारी

ऑडिट रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डीएनआईटी कंडीशन के तहत काम पूरा होना था, लेकिन न तो ठेकेदार ने इन नियमों का पालन किया और न ही विभाग ने कोई जुर्माना लगाया। नियमों के अनुसार 10 फीसदी काम 72 दिनों में पूरा होना चाहिए था अन्यथा टेंडर राशि का 0.7 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाना चाहिए था जो करीब 29.18 लाख रुपये बनता है। इसी तरह 25 फीसदी काम 180 दिनों और 50 फीसदी काम 288 दिनों में पूरा होना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विभाग की लापरवाही से ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। रिपोर्ट के अनुसार अगर पूरी पेनल्टी लगाई जाती तो इसकी राशि करीब दो करोड़ रुपये होती।

ठेकेदार ने जमा नहीं की प्रोग्रेस रिपोर्ट, न विभाग ने मांगी

आडिट में कहा गया है कि नियमों के अनुसार हर 10 दिन पर साइट प्रोग्रेस की रिपोर्ट देने की भी शर्त थी जिसमें मैनपॉवर, फाइनेंशियल प्रोग्रेस और मटेरियल की जानकारी शामिल होती लेकिन यह रिपोर्ट कभी जमा नहीं हुई। हैरानी की बात है कि विभाग ने भी इसे मांगनी जरूरी नहीं समझी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकेदार ने कर्मचारियों के ईएसआई और पीएफ का रिकॉर्ड भी विभाग को नहीं दिया और विभाग ने इसे मांगने की जरूरत तक नहीं समझी।

करोड़ों का प्रोजेक्ट लेकिन टेक्निकल स्टाफ नहीं

ऑडिट ने यह भी पाया कि ठेकेदार ने साइट पर आवश्यक टेक्निकल स्टाफ की तैनाती नहीं की। नियमों के अनुसार साइट पर प्रोजेक्ट मैनेजर, साइट इंजीनियर, प्लानिंग इंजीनियर और बिलिंग इंजीनियर जैसे योग्य तकनीकी कर्मियों की उपस्थिति जरूरी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पर विभाग को 27.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाना चाहिए था।

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