मामले में कानूनी स्थिति का खुलासा करते हुए एडवोकेट जनरल ने बताया कि स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट एक्ट (जिसके अधीन सीबीआई कार्य करती है) की धारा 6 के तहत किसी भी राज्य में आपराधिक घटनाएं घटती हैं तो उसकी पड़ताल के लिए आईपीसी के अधीन संबंधित राज्य सरकार की सहमति अपेक्षित है।
नंदा के अनुसार, कुछ दोषियों से पूछताछ करने के बावजूद एसआईटी ने अन्य दोषियों की भूमिका का पर्दाफाश किया। कुछ दोषियों के घरों की छानबीन की गई, जिससे कई सबूत सामने आए। इनमें मोबाइल चिप, ऐसी घटनाओं को अंजाम देने की बातचीत, गोला बारूद, घटनाएं कराने के लिए 6 करोड़ रुपये तक के फंड का भुगतान आदि शामिल थे।
तीन साल तक जांच करने में सीबीआई असफल रही
पहले अकाली शासन द्वारा इस तरह की सहमति देने के बावजूद सदन के प्रस्ताव के तर्ज पर 6 सितंबर, 2018 को राज्य सरकार ने सीबीआई से यह केस वापस लेने के लिए औपचारिक नोटिफिकेशन पास कर दिया था। उन्होंने आगे बताया कि इस कार्रवाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 जनवरी, 2019 को अपने निर्णय में कायम रखा, जो कुछ दोषी पुलिस अफसरों द्वारा दर्ज किया गया था।
अदालत ने नोट किया था कि सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई की केस डायरी की मांग की और इसका निरीक्षण किया। यह स्पष्ट था कि मामलों में कोई भी प्रगति नहीं हुई है। तकरीबन तीन साल बीत जाने के बावजूद पड़ताल के स्तर संबंधी सीबीआई के वकील को कुछ विशेष सवाल पूछे गए लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। दरअसल सीबीआई इस निर्णय को चुनौती देने में असफल रही।
कैप्टन के रुख पर खैरा ने उठाए सवाल
पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामलों में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा सीबीआई के दोबारा जांच सौंपे जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
गुरुवार को जारी एक बयान में खैरा ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि सीबीआई से मामले वापस लेने के लिए विधानसभा द्वारा पास किए गए प्रस्ताव को लागू करने में वे असफल क्यों रहे? खैरा ने पूछा कि एक तरफ तो मुख्यमंत्री मामलों की जांच पंजाब पुलिस की एसआईटी से करवाए जाने की वकालत कर रहे हैं और दूसरी तरफ सीबीआई को दोबारा केस खोलने के लिए कह रहे हैं।
खैरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बेअदबी मामलों के दोषी डेराप्रेमियों को क्लीन चिट देने के लिए अकालियों और भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। खैरा ने आरोप लगाया कि सुखबीर बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बयान को इकट्ठा करके देखा जाए तो एक आम आदमी भी यह समझ सकता है कि बेअदबी मामलों की जांच को तहत नहस करने और लोगों को गुमराह करने का इन दोनों नेताओं ने यह तरीका निकाला है।
बरगाड़ी केस पर श्वेत पत्र लाए सरकार: अरोड़ा
आम आदमी पार्टी के विधायक अमन अरोड़ा ने मांग की है कि बरगाड़ी और बहिबल कलां कांड में जांच की प्रगति पर सरकार श्वेत पत्र जारी करे। उन्होंने शुक्रवार से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में इस पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने को लेकर स्पीकर को नोटिस दिया है। नोटिस में उन्होंने मांग की है कि इस मुद्दे पर दो दिन बहस कराई जाए।
इस संबंध में हुई सभी जांच का नतीजा सदन में बताया जाए। एक बयान में अमन ने कहा कि इस कांड के बाद सरकार ने कई एफआईआर दर्ज कीं। दो न्यायिक आयोग, तीन एसआईटी बनाईं और सीबीआई जांच के बाद भी कुछ स्पष्ट नहीं है। सीएम सदन में सभी जांचों का नतीजा बताएं और स्थिति स्पष्ट करें।