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‘प्राथमिक स्वास्थ्य व नशा उन्मूलन पर देना होगा ध्यान, तब चिकित्सा के क्षेत्र में जमेगी धाक’

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चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार परचम फहराते हुए शहर को गौरवान्वित कर रहा है। चाहे पीजीआई का नेशनल इंस्टीट्यूटशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क में लगातार 5वीं बार दूसरे स्थान को प्राप्त करना हो या टीकाकरण और ऑक्सीजन प्रबंधन में देशभर में अव्वल आने की बात, इन सभी क्षेत्रों में चंडीगढ़ ने अपने मेहनत और लगन के बल पर झंडे गाड़े हैं। इसके बावजूद शहर के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य व नशा उन्मूलन पर भी विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही अभी कुछ क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर काम किया जाना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार अगर उन प्रमुख बिंदुओं पर काम करके सफलता प्राप्त कर ली गई तो सिटी ब्यूटीफुल के स्वास्थ्य सुविधाएं की बेहतरी के लिए देश में मिसाल बनेगा।
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प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देने का समय
मौजूदा समय में चंडीगढ़ के अस्पतालों की स्थिति काफी अच्छी है। पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएस-16 में इमरजेंसी की सेवाएं सामान्य सेवाओं के समकक्ष संचालित की जा रही हैं। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर देना होगा। कोशिश किया जाना चाहिए कि शहर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आठ घंटे की बजाय 12 घंटे खोलें जाएं जिससे उस क्षेत्र की आबादी जरूरत पड़ने पर उन केंद्रों का लाभ उठा सकें, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा है। इस कारण पीजीआई, जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 पर सामान्य मरीजों का भी दबाव दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दौरान उन्हें कंप्यूटर नेटवर्किंग सिस्टम से लैस करने पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि मरीजों का डाटा सुरक्षित रखा जा सके। मेरा मानना है कि कुछ सेक्टरों में रात में भी स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए क्योंकि रात में सेंटर बंद होने से छोटी मोटी समस्या होने पर भी लोग बड़े अस्पतालों में जाने को मजबूर होते हैं। इसलिए बड़े अस्पतालों में भीड़ कम करने के लिए छोटे स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ बनाना जरूरी है।
-डॉ. जी दीवान, पूर्व निदेशक स्वास्थ्य चंडीगढ़
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निजी चिकित्सा तंत्र को भी मजबूत करना जरूरी
पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 जैसे संस्थानों की वजह से चंडीगढ़ को मेडिकल हब माना जाता है। तथ्य यह है कि इन संस्थानों में 85 प्रतिशत से अधिक रोगी पड़ोसी राज्यों से हैं इसलिए सरकारी क्षेत्र को सुव्यवस्थित करने और घटती निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सरकारी और निजी स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। चंडीगढ़ एक लैंडलॉक शहर है, इसमें बुजुर्ग लोगों की एक बड़ी आबादी है और बहुत से कामकाजी एकल परिवारों को पड़ोस में स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 1999 में आवासीय क्षेत्रों में नर्सिंग होम को नियमित किया था। लगभग 30 नर्सिंग होम को नियमित किया गया। मौजूदा समय में आधे से ज्यादा बंद हो चुके हैं। अब निवासियों को मामूली इलाज के लिए पड़ोसी राज्यों में जाना पड़ रहा है। आवासीय क्षेत्रों में समान संख्या में नर्सिंग होम को बदलने के प्रस्ताव को लोकतांत्रिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अंतिम रूप दिया गया है। उसे शीघ्र लागू करना होगा। इसके साथ ही जीएमसीएच, जीएमएसएच और पीजीआई में आने वाले मरीजों के लिए एक ट्राइएज सिस्टम अपनाया जाना चाहिए। एक केंद्रीय पोर्टल होना चाहिए, जिसमें खाली बेड व अन्य सुविधाओं की पल-पल की सूचना अपडेट होती रहे ताकि सुविधा उपलब्ध न होने पर उसे केंद्र पर मरीज को ले जाने के लिए कीमती समय बर्बाद न किया जाए। उस पोर्टल को पड़ोसी राज्यों के अस्पतालों से जोड़ा जाना चाहिए ताकि रेफरल प्रणाली को सुव्यवस्थित किया जा सके। विजन प्लान के रूप में हर 100 किलोमीटर में ऐसे और रेफरल संस्थान खोले जाने चाहिए।
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-डॉ. आरएस बेदी, विश्व चिकित्सा संघ के सलाहकार
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नशे पर काबू पर भी व्यापक काम करने की जरूरत
चंडीगढ़ प्रशासन को तंबाकू के खिलाफ कानूनों में उपलब्ध सभी प्रावधानों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। आबकारी और कराधान अधिनियम और एनडीपीएस अधिनियम को कड़ाई से लागू करना होगा। मौजूदा समय में स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी के लिए नशे जैसे दंश पर काबू बेहद जरूरी हो गया है क्योंकि चंडीगढ़ और उसके आसपास के अन्य प्रदेशों के युवा नशे की गिरफ्त में तेजी आ रहे हैं। इससे उनकी सेहत तेजी से प्रभावित हो रही है। हुक्का बार को स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। शिक्षा पाठ्यक्रम में तंबाकू/शराब के दुरुपयोग और नशीली दवाओं की लत, इसके प्रभाव और नशामुक्ति पर भी अध्याय शामिल होने चाहिए। उचित परामर्श एक अन्य विकल्प है। सभी प्रमुख अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य केंद्रों तथा नशा मुक्ति केंद्रों में तंबाकू निषेध केंद्र खोले जाएं। इन केंद्रों पर आने वाले सभी लोगों को बिहेवियरल थेरेपी और फार्माकोथेरेपी मुफ्त प्रदान की जानी चाहिए।
-डॉ. आरके गुप्ता, पूर्व निदेशक स्वास्थ्य, पंजाब
लाखों मरीजों को मिल रहा इलाज
चंडीगढ़ में शहर की जनता के साथ ही एक साल में देशभर के लगभग 35 लाख मरीजों को इलाज मिल रहा है। इसमें पीजीआई में लगभग 27 से 28 लाख व जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में छह से सात लाख मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। इन मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 3720 बेड का संचालन किया जा रहा है।
आने वाले समय में बढ़ेगी और भी सुविधाएं
आने वाले एक से डेढ़ साल में शहर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में आशातीत उपलब्धि हासिल करेगा। अकेले पीजीआई में कई बड़ी योजनाएं पूरी होने से मरीजों को उच्च श्रेणी की चिकित्सा सेवा उपलब्ध होंगी। इनमें 300 बेड का मदद एंड चाइल्ड केयर सेंटर, फिरोजपुर सैटेलाइट सेंटर, संगरूर सैटेलाइट सेंटर, ऊना सैटेलाइट सेंटर व हिमाचल और पंजाब में स्वीकृत तीन सैटेलाइट सेंटर शामिल हैं। पीजीआई में निर्माणाधीन 300 बेड के एडवांस न्यूरोसाइंस सेंटर की सुविधा 2022 के अंत तक में मिलने लगेगी। वहीं दूसरी तरफ जीएमसीएच-32 में 300 बेड के ट्रामा सेंटर और 300 बेड के मदर चाइल्ड केयर सेंटर का भी निर्माण दो से तीन साल के बीच पूरा कर लिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के तहत जीएमएसएच-16 में 300 बेड के मदर चाइल्ड केयर सेंटर का निर्माण भी शीघ्र शुरू होने वाला है।
कोट-
निरफ रैंकिंग में लगातार पांचवीं बार देश के चिकित्सा संस्थानों में दूसरा स्थान प्राप्त कर पीजीआई ने साबित कर दिया है कि वह मेहनत और सफलता की कसौटी पर खुद को कसकर काम कर रहा है। हमारा प्रयास इससे और बेहतर करना है। जहां तक नए आयाम की बात है तो पीजीआई अपने सेटेलाइट सेंटरों के पूर्ण संचालन को लेकर बेहद गंभीर है और इसे शीघ्र शुरू करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। वहीं पीजीआई में निर्माणाधीन विभिन्न योजनाएं भी जल्द पूरी होने वाली हैं। इसके बाद मरीजों को और उच्चस्तरीय चिकित्सा मुहैया कराया जाएगा। शोध के क्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।
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-प्रो. विवेक लाल, निदेशक पीजीआई
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