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Chandigarh News: बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक व अन्य की 5.92 लाख की संपत्ति अटैच

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11 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में चंडीगढ़ जोनल प्रवर्तन निदेशालय ने की कार्रवाई

- वर्ष 2021 में चंडीगढ़ सीबीआई ने दर्ज किया था केस

हरीश कोचर
चंडीगढ़। गोहाना स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा के मुख्य प्रबंधक मनजीत सिंह व अन्य के खिलाफ चंडीगढ़ सीबीआई की ओर से दर्ज 11 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े के मामले में ईडी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में करीब 9.18 करोड़ रुपये का गड़बड़झाला सामने आया है। रिपोर्ट के आधार पर चंडीगढ़ जोनल प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपी बैंक मैनेजर मनजीत सिंह व अन्य की करीब 5.92 लाख रुपये की कृषि योग्य भूमि अटैच कर ली है। साथ ही आरोपियों की अन्य संपत्तियों व बैंक खातों में जमा राशि को भी जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। इसकी रिपोर्ट ईडी ने सीबीआई कोर्ट में भी पेश की है।
चंडीगढ़ सीबीआई ने फरवरी 2021 में बैंक ऑफ बड़ौदा के करनाल मंडल के क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक सत्यप्रकाश की शिकायत पर बैंक ऑफ बड़ौदा की गोहाना शाखा व बाद में रोहतक शाखा के मुख्य प्रबंधक मनजीत सिंह व अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 467, 471, 477ए, 120बी व पीसी एक्ट सहित मामला दर्ज किया था। शिकायत के मुताबिक, बैंक में पहले पांच ओडीबीओडी (लोन अकाउंट) खोले गए। इसके लिए बैंक में एफडी करवाने वाले 163 उपभोक्ताओं के अकाउंट को गारंटी के तौर पर लोन अकाउंट से लिंक किया गया। बाद में लोन अकाउंट की निकासी लिमिट को 21 हजार से बढ़ाकर 2 करोड़ कर दिया गया। इसके बाद 11 करोड़ से ज्यादा की रकम गलत तरीके से ट्रांसफर कर ली गई। बाद में गोहाना से मनजीत सिंह का तबादला रोहतक हो गया, वहां भी फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
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दिल्ली सीबीआई की 8 सदस्यीय टीम ने केस दर्ज होने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा की गोहाना शाखा में जांच कर दस्तावेज कब्जे में लिए थे। कुछ उपभोक्ताओं को भी जांच में शामिल करने के लिए बुलाया। बाद में टीम ने उपभोक्ताओं सहित स्टाफ सदस्यों के भी बयान दर्ज किए। उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें लोन खाते खोलने के संबंध में कोई जानकारी ही नहीं थी।



ईडी ने अपनी जांच में किया फर्जीवाड़े का खुलासा
मामले की जांच बाद में ईडी को सौंपी गई। ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपी मुख्य प्रबंधक मनजीत सिंह ने बैंक स्टाफ को धोखे में रखकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। प्रबंधक ने अपनी पत्नी व रिश्तेदारों समेत अन्य के नाम पर सभी 5 फर्जी अकाउंट के जरिए 163 लोगों की एफडी पर 11 करोड़ का लोन ले लिया। मैनेजर ने एक उपभोक्ता की एफडी पर लोन ओवर ड्राफ्ट अगेंस्ट बैंक ऑन डिपॉजिट यानि ओडीबीओडी से 39 लाख रुपये अपने आईसीआईसीआई खाते में भी ट्रांसफर किए थे। जिन लोगों के खातों की एफडी पर मैनेजर ने लोन लेकर फर्जीवाड़ा किया, उनमें से एक की एफडी 2.27 करोड़ रुपये की थी। जनवरी 2021 में इस एफडी का समय पूरा हो रहा था। अकाउंट होल्डर ने अपनी एफडी कैश करने के लिए क्लेम किया तो पता चला कि उसकी एफडी पर थर्ड पार्टी निशा रानी के नाम 90 फीसदी पैसा लोन की गारंटी के तौर पर जारी हो चुका है। अकाउंट होल्डर ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के हिसार और करनाल रीजन ने अपने स्तर पर मामले की जांच शुरू की। इसके बाद सीबीआई ने केस दर्ज किया। जांच के दौरान जिन खातों में पैसे ट्रांसफर हुए थे उनके दस्तावेज भी पूरे नहीं मिले।
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अब ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत आरोपियों की कृषि भूमि के रूप में 5.92 लाख (अपराध की आय) जब्त की। जांच में पता चला कि मैनेजर ने ओडीबीओडी खातों से प्राप्त इस राशि का उपयोग शेयर बाजार में इंट्रा ट्रेडिंग के लिए किया। मैनेजर मनजीत सिंह द्वारा खोले गए उल्लिखित ओडीबीओडी खातों के संबंध में दोनों बैंक शाखाओं (गोहाना और रोहतक) में से किसी में भी कोई ऋण दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि मनजीत सिंह ने पीएमएलए, 2002 की धारा 2(1)(यू) में परिभाषित अपराध से रुपये की आय अर्जित की है।
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