2019 के लोकसभा चुनाव का अहम महत्व है क्योंकि 1977 के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टियों ने एक मंच पर इतनी बड़ी मौजूदगी दर्ज करवाई है। सोची समझी रणनीति के तहत क्षेत्रीय पार्टियां देश की उदारवादी और धर्म निष्पक्षता के प्रति पूरी तरह वचनबद्ध हैं। मोदी सरकार को एकसाथ चुनौती देने का सभी दलों ने फैसला किया है। यह मकसद देश की संवैधानिक सामाजिक सांस्कृतिक मर्यादा को कायम रखने के लिए किया गया है। यह बात कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार ने अपने घर पर विशेष बातचीत के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि इस गठबंधन में सबसे अहम बात यह है कि सभी राजनीतिक दल जो पहले एक दूसरे के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे हैं वह 1977 के बाद पहली बार अपने राजनीतिक फायदे को अलग रखते हुए एकजुट हुए हैं। ममता बनर्जी, फारुख अब्दुल्ला, देवगौड़ा, कुमार स्वामी, लालू यादव, शरद पवार, मायावती, वामपंथी दल के नेताओं के साथ पहले दौर की बातचीत सफल रही है।
उन्होंने बताया कि उनकी खुद की बात लगभग सभी पार्टियों के नेताओं के साथ हुई है और सभी इस गठबंधन से बेहद खुश हैं। कुमार ने बतायाकि राहुल गांधी ने एलान किया है कि प्रधानमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में कोई गतिरोध नहीं होगा। उक्त सभी दल के नेताओं ने भी यह स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री पद को लेकर कोई फैसला नहीं करेगा। यह फैसला चुनाव के बाद ही होगा। हालांकि, सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी संबंध में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है, जबकि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेता गठबंधन के लिए प्रयास कर रहे हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने वाले इमरान खान का भारत के साथ रिश्ते सुधराने के संबंध में दिए बयान को कुमार ने सही करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को सचेत रहते हुए पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की चेष्ठा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूबे की कांग्रेस सरकार अभी तक अच्छा काम कर रही है।
चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल संबंधी पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि कांग्रेस और सभी सहयोगी पार्टियों ने एकजुट होकर 2019 के चुनाव बैलेट पेपर पर करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नवीन पटनायक, शिव सेना और अकाली दल भाजपा के साथ गठबंधन में रहकर अंदरूनी रूप से खुश नहीं है।