दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल, जालंधर के प्रमुख आशुतोष महाराज के दाह संस्कार के मामले में पंजाब सरकार बचाव मुद्रा में आ गई है। सरकार ने हाईकोर्ट में दायर अपील में कहा है कि वह केवल लावारिस लाशों के लिए जिम्मेदार है लेकिन, आशुतोष महाराज लावारिस नहीं है।
वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में आशुतोष महाराज के दाह संस्कार मामले में अंतिम बहस होनी थी लेकिन सरकार ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित करने की मांग कर डाली कि सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया रंजीत कुमार आ नहीं सके और वही बहस करेंगे।
इस पर जस्टिस एसके मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई 28 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी है। बता दें कि आशुतोष महाराज के बेटे दिलीप झा ने अपने पिता के शव को उसे सौंपने को लेकर याचिका दायर की थी। दिलीप ने आशंका जताई थी कि आशुतोष महाराज की हत्या हुई है। हालांकि, यह याचिका खारिज हो गई थी, लेकिन एकल बेंच ने पंजाब सरकार को दाह संस्कार करने का आदेश दिया था।
दिलीप ने पेश किया रिकॉर्ड
दिलीप झा ने अपने वकील एसपी सोई के माध्यम से वीरवार को कई ऐसे दस्तावेज पेश किए, जिनके आधार पर वह आशुतोष महाराज और महेश कुमार झा को एक ही व्यक्ति बता रहा है। एडवोकेट सोई ने नूरमहल में आशुतोष महाराज के वोट का रिकार्ड और परिवार से संबंधित बिहार का सरकारी रिकॉर्ड पेश किया। इन दोनों में आशुतोष के पिता का नाम एक समान है।
इसके अलावा 81 साल के कुलपुरोहित पंडित बाल किशन झा का शपथ पत्र पेश किया, जिसमें कहा है कि उसने महेश कुमार झा की शादी दिलीप की मां निवेदी देवी से कराई। यह भी कहा कि उसी ने आशुतोष महाराज का नामकरण भी महेश कुमार झा केतौर पर किया था। सोई ने महेश कुमार झा के भाई भवेश्वर झा और तंतेश्वर झा के शपथ पत्र भी पेश किए, जिसमें उन्होंने महेश को अपना भाई बताया है।