लोकसभा में कांग्रेस की करारी हार के बाद प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि लोकसभा में हार सिर्फ प्रदेशाध्यक्ष की नहीं है, बल्कि हरियाणा की पूरी कांग्रेस टीम की सामूहिक जिम्मेदारी है। पत्रकार वार्ता के दौरान तंवर ने कहा कि जो लोग मेरे इस्तीफे की बात कर रहे हैं, दरअसल वे न तो मेरे हितैषी है और न ही कांग्रेस के।
मैं अपने विरोधियों के जाल में फंसने वाला नहीं हूं, हां यदि हाईकमान मुझसे इस्तीफा मांगता है तो मैं जरूर दे दूंगा। उनके अनुसार यह समय फिर से एकजुट होकर विधानसभा की तैयारी करने का है, न कि एक-दूसरे की टांग खिंचाई करने का।
तंवर ने कहा कि मेरे विरोधी मुझसे इस्तीफा तो पिछले पांच साल से मांग रहे हैं। लेकिन मैं यह पूछना चाहता हूं कि वर्ष 2014 के पहले तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार भी थी और संगठन भी था, तब कांग्रेस 2014 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव क्यों हारी।
तंवर ने कहा कि कार्यकर्ताओं को हार से निराश होने की जरूरत नहीं हैं। वे एकजुट होकर अब विधानसभा की तैयारियों में जुट जाएं। इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि इस चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम में गड़बड़ी की गई है।
उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि कई सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों का जनता सार्वजनिक रूप से खुलकर विरोध कर रही थी, लेकिन जब ईवीएम खुली तो जनविरोध झेलने वाले वही प्रत्याशी बड़े अंतर से जीत जाते हैं।
यह ईवीएम का ही चमत्कार है। तंवर ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस को भी आज राहुल गांधी के नेतृत्व की जरूरत है, उन पर लगातार अध्यक्ष पद न छोड़ने का दबाव बन रहा है, यकीन है कि राहुल भी अपना फैसला जरूर बदलेंगे।