क्या केजरीवाल लक्ष्मीकांता चावला को अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर पेश करने की किसी रणनीति पर काम कर रहे हैं, ये सवाल सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल अकाली दल ने तो इस घटनाक्रम को किसान आंदोलन की तरफ मोड़ते हुए केजरीवाल और भगवंत मान पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया है। पंजाब कांग्रेस इस घटनाक्रम पर खामोश है।
वहीं अगर केजरीवाल की यही रणनीति है तो पंजाब में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होगा, क्योंकि कांग्रेस में खुद को अलग-थलग महसूस करने लगे नवजोत सिंह सिद्धू के लिए लक्ष्मीकांता चावला बहुत ही आदरणीय शख्सियत हैं और सिद्धू उनके मार्गदर्शन में काम करने से हिचकेंगे नहीं। वहीं, किसान आंदोलन के कारण प्रदेश में जनविरोध का सामना कर रही पंजाब भाजपा के लिए यह सबसे बड़ा झटका होगा, क्योंकि पार्टी अंदरखाते धड़ों में बंट चुकी है और सीनियर नेता लंबे समय से चुप्पी साधे बैठे हैं।