मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पंजाब दौरे पर टिकीं नजरें
आम आदमी पार्टी की सारी उम्मीदें अपने राष्ट्रीय कन्वीनर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पंजाब दौरे पर टिकी हैं। पार्टी को लग रहा है कि केजरीवाल के दौरे से डैमेज कंट्रोल होगा। उधर, पार्टी की निगाहें छह सितंबर से शुरू हो रहे सुच्चा सिंह छोटेपुर के पंजाब दौरे पर भी लगी हैं।
पिछले कुछ दिन आप के लिए काफी मुश्किल भरे रहे हैं। पहले छोटेपुर का स्टिंग, उसके बाद छोटेपुर का आप से अलग होना। फिर तेरह में सात जोनल कॉर्डिनेटरों का छोटेपुर के साथ जाना पार्टी को भारी पड़ा है। पूरे घटनाक्रम से निचले स्तर के वॉलंटियर्स में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
सभी उत्सुक हैं कि कौन ज्यादा मजबूत होगा, छोटेपुर या आम आदमी पार्टी। आप की नजरें की छोटेपुर के दौरे पर लगी हैं। वह छह को गुरदासपुर से अपने पंजाब दौरे का आगाज करेंगे। उसके बाद सात को जालंधर, आठ को रोपड़ और नौ को फतेहगढ़ साहिब जाएंगे।
सभी जगह जाकर वह वॉलंटियर्स के साथ बैठकें करेंगे, अपने अगले कदम के बारे में उनकी राय लेंगे। उसके बाद ही वह फैसला लेंगे। आप की नजरें इसी बात पर लगी हैं कि छोटेपुर को जिलों में कितना रिस्पॉन्स मिलता है, कितने वॉलंटियर या पार्टी से नाराज अन्य लोग उनके साथ जाते हैं।
किसान मेनिफेस्टो समागम में ताकत दिखाएगी पार्टी
Kejriwal Protest
- फोटो : Amar ujala
उधर, पार्टी को पूरी उम्मीद है कि पिछले दिनों घटनाक्रम की वजह से जो भी विपरीत परिस्थितियां बनी हैं, वे केजरीवाल केआने से ठीक हो जाएंगी। केजरीवाल अब नौ के बजाय आठ सितंबर को आएंगे। नौ को वह पटियाला में डॉक्टरों और प्रोफेसर्स को संबोधित करेंगे। दस को संगरूर हलके में जाने का प्रोग्राम अभी फाइनल नहीं हुआ है। 11 को वह बाघा पुराना, मोगा में किसान मेनिफेस्टो रिलीज करेंगे। हालातों को देखते हुए इस बार केजरीवाल की वॉलंटियर्स के साथ कई बैठकें रखी गई हैं। साथ ही वह टिकट वितरण से नाराज लोगों का दुखड़ा भी सुनेंगे। आप की कोशिश है कि निचले स्तर तक कैडर में यह मैसेज जाए कि इन बातों से पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।
किसान मेनिफेस्टो समागम में ताकत दिखाएगी पार्टी
आम आदमी पार्टी ने पहले किसान मेनिफेस्टो रिलीज करने को एक आम समागम करने का फैसला किया था। इसमें पूरे पंजाब से किसानों को बुलाया जाना था, लेकिन मौजूदा हालातों में पार्टी ने अब शक्ति प्रदर्शन का फैसला किया है। ताकि यह मैसेज दिया जा सके कि पिछले दिनों हुए घटनाक्रम का पार्टी पर कोई असर नहीं हुआ है। ऊपरी तौर पर पार्टी यह नहीं मान रही है, लेकिन अंदरखाते इसकी पूरी तैयारी की जा रही है।