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जबरन कर दिया गया था सेना से रिटायर, 31 साल बाद मिला न्याय, मिलेगी पेंशन

Sat, 10 Feb 2018 09:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व सैनिक के हक में सुनाया फैसला
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मेजर ध्यानचंद अवार्ड विजेता और एशियन गेम्स समेत कई मुकाबलों में देश का नाम रोशन कर चुके पूर्व फौजी हाकम सिंह को आखिरकार 31 साल बाद इंसाफ मिल गया। आर्मी ट्रिब्यूनल कोर्ट ने पूर्व फौजी के हक में फैसला सुनाते हुए उनकी डिसबिलिटी (दिव्यांगता) पेंशन बहाल कर दी है।
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साथ ही पूर्व फौजी और उनकी पत्नी की मेडिकल सुविधा को भी बहाल कर दिया है। यह सब एक्स सर्विसमैन ग्रीवांस सेल के प्रधान रिटायर्ड कर्नल एसएस सोही के प्रयास से संभव हुआ है। शुक्रवार को फेज-10 स्थित सैनिक सदन में उन्होंने इस संबंध मेें प्रेस कांफ्रेंस कर फैसले की जानकारी दी। इस दौरान फैसले की खुशी में लड्डू बांटे गए।

1987 में जबरदस्ती सेना से कर दिया था रिटायर
कर्नल सोही ने बताया कि नायक हाकम सिंह निवासी भठलां जिला संगरूर के रहने वाले हैं। वह छह सिख रेजिमेंट में 1972 में भर्ती हुए थे। फौज की नौकरी के दौरान उन्होंने 1977 और 1979 में हुए एशियन गेम्स में 20 किलोमीटर पैदल मुकाबले में दो बार गोल्ड मेडल जीता था।
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नौकरी के दौरान नायक हाकम सिंह ने अपनी फौज की कंपनी के खेलों के ऊपर कमेंट कर दिया था, जो उनके कमांडिंग ऑफिसर को अच्छा नहीं लगा। साथ ही उनके कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें नौकरी से निकालनेे का प्रेशर बनाया। उनका आरोप था कि या तो वह नौकरी छोड़ दें नहीं तो उनका कोर्ट मार्शल किया जाएगा। इसके बाद वर्ष 1987 में हाकम सिंह को जबरदस्ती रिटायर कर दिया गया।
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चलने-फिरने में असमर्थ हैं हाकम सिंह

court - फोटो : Demo Photo
छह महीने के चक्कर में नहीं लग पाई पेंशन
पीड़ित के वकील ने बताया कि जब हाकम सिंह को जबरदस्ती रिटायर किया गया तो उनकी सर्विस कुल 14 साल छह महीने की हुई थी। इसके चलते उनकी पेंशन नहीं बन रही थी, क्योंकि पेंशन के लिए 15 साल की सर्विस जरूरी थी।

इसके अलावा सेना की तरफ से उन्हें अन्य लाभ भी नहीं दिए गए। इसके बाद से उन पर आफत का दौर शुरू हो गया। हालांकि उन्होंने पंजाब पुलिस में करीब दस साल काम किया लेकिन बाद में उनकी हालत काफी खराब हो गई। इसके बाद वह बेड पर ही आ गए थे। हालांकि 2008 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया था।

ऐसे शुरू हुई कानूनी जंग
पूरी तरह बेड पर आने के बाद हाकम सिंह ने कर्नल सोही की संस्था से संपर्क किया। इसके बाद उनके वकील एनआर ओझा के माध्यम से केस लड़ा। वकील आरएन ओझा ने बताया कि आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ ने उनके हक में फैसला सुनाया है। 1986 से पेंशन का लाभ, 1996 से 50 फीसदी अंगहीनता पेंशन, मेडिकल सुविधाएं, छह साल का एरियर, कैंटीन व पूर्व फौजी को मिलने वाली सारी सुविधाएं दी जाएंगी। ऐसे में उन्हें दस लाख से ज्यादा की राशि मिलेगी।

चलने-फिरने में असमर्थ हैं हाकम सिंह
कर्नल सोही ने बताया कि नौकरी से जबरन निकाले जाने के बाद से हाकम सिंह की मानसिक स्थिति अच्छी नहीं चल रही है। वहीं, अब उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। ऐसे में कांफ्रेंस में भी नहीं पहुंच पाए हैं।
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