हाईकोर्ट ने कहा, अगर अगली सुनवाई पर जवाब नहीं आया तो जुर्माने के लिए तैयार रहे नगर निगम और सरकार
प्रतिमा के निर्माण का खर्च का ब्यौरा, निर्माण गिराने का आदेश हुआ तो कौन खर्च पर भी मांगा जवाब
चंडीगढ़। रोहतक में मेयर के पिता की प्रतिमा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हरियाणा सरकार व निगम ने एक बार फिर से जवाब के लिए समय मांगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई पर जवाब नहीं आया तो नगर निगम व सरकार जुर्माने के लिए तैयार रहें। याचिका दाखिल करते हुए रोहतक निवासी देवेंद्र शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में आदेश दिया था कि सरकार भूमि पर किसी भी प्रतिमा को स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद इसी वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री के पिता की को स्थापित किया गया था जिसके खिलाफ याची ने जनहित याचिका दाखिल की थी। जनहित याचिका पर सरकार ने जानकारी दी थी कि इस प्रतिमा को हटा दिया गया है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को आदेश दिया था कि वह निगरानी करें और सरकारी भूमि पर ऐसी सभी प्रतिमाओं की पहचान कर इन्हें हटवाएं। इसके बाद जुलाई 2023 में सरकार ने रोहतक के मेयर के पिता की प्रतिमा को लगाने की अनुमति दे दी। याची ने बताया कि यह प्रतिमा पुलिस बीट बॉक्स को हटा कर स्थापित की गई है। याची ने इसके खिलाफ मांगपत्र भी दिया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। अब ऐसे में याची को इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में सरकार व नगर निगम को प्रतिमा के निर्माण का खर्च किसने किया और यदि इसे गिराने का आदेश दिया गया तो उसका खर्च कौन वहन करेगा इस पर जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दिया है। साथी ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई पर जवाब नहीं आया तो सरकार जुर्माने के लिए तैयार रहे।