मीट में इन बिंदुओं पर होगी चर्चा
- सेब, फलों और सब्जियों की नीलामी का तरीका क्या होना चाहिए, ताकि किसानों की आय में काफी वृद्धि हो।
- बाजार में किस प्रकार के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए, ताकि किसानों, किसानों के समूहों, उपभोक्ताओं, व्यापारियों और अन्य हितधारकों को बड़े पैमाने पर लाभान्वित किया जा सके
- कार्यालय की जगह, कोल्ड स्टोर, दुकानें, ग्रेडिंग की सुविधा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को कैसे आवंटित किया जाए ताकि बाजार से नियमित आय उत्पन्न हो सके।
- कोल्ड, सीए स्टोर्स, रिपिंग चैंबर्स, सॉर्टिंग ग्रेडिंग व मानकीकरण सुविधाएं सरकार उपलब्ध कराएगी या पीपीपी मोड के तहत बिल्ड, ऑन, ऑपरेट आधार पर निजी उद्यमियों को देंगे।
फूलों, फलों और सब्जियों का निर्यात बढ़ाने की तैयारी
हरियाणा में सरकार अब फूलों, फलों और सब्जियों का निर्यात बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ताकि इनकी खेती करने वाले किसानों की आमदनी बढ़ सके और साथ ही निर्यात बढ़ने से प्रदेश के आर्थिक विकास रफ्तार पकड़े। कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल ने इस संदर्भ में बागवानी विभाग के अफसरों के साथ बैठक कर मंथन किया।
बैठक के दौरान मंत्री जयप्रकाश दलाल ने बताया कि प्रदेश में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सब्जियों, फलों और फूलों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं को बागवानी संबंधित कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि उन्हें विदेश में रोजगार योग्य बनाया जा सके। बैठक में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के निदेशक डा. बीएस सेहरावत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फूलों का बाजार बहुत बड़ा बाजार है इसलिए फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रचार प्रसार किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान फूलों की खेती को अपनाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाए ताकि किसानों की आमदनी में वृद्धि करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जिन योजनाओं के तहत सब्सिडी दी जा रही है, उनकी समय-समय पर पूरी तरह से निगरानी भी की जाए। दक्षिण हरियाणा में भी बागवानी को बढ़ाने के लिए नए-नए प्रयोग अमल में लाए जाएं ।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2018-19 में प्रदेश में 66,712 हेक्टेयर क्षेत्र में फलों, 4,20,857 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती की गई। बैठक में बताया गया कि मशरूम की खेती में लगभग 180 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है और हरियाणा का सोनीपत मशरूम की खेती के लिए देश में पहले स्थान पर है।