गीता जयंती के आयोजन को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे 'संत' रामपाल से पूछा गया कि तीर्थ यात्रा, हज पर पैसे खर्च हो सकते हैं तो गीता पर क्यों नहीं?
सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल की ओर से कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव के सरकारी आयोजन को जनहित याचिका के जरिये चुनौती देने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तीर्थ यात्रा या हज पर पैसे खर्च हो सकते हैं तो गीता पर क्यों नहीं।
अदालत ने टिप्पणी की है कि हम यह निर्धारित नहीं कर सकते कि हिंदुत्व धर्म है, या जीवन शैली। इस पर रामपाल ने दलील दी कि गीता का प्रचार करना, धर्म पर लोगों के पैसों को खर्च करना है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या गीता का संदेश केवल हिंदुओं के लिए है।
इस बीच अपने जवाब में एजी हरियाणा की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार गीता का प्रचार इससे जुड़े इतिहास के चलते कर रही है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिकाकर्ता से मामले की अगली सुनवाई तक मामले में याचिका दायर करने के अधिकार पर जवाब देने को कहा है।
अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी
International Geeta Jayanti Festival
मामले में अगली सुनवाई अब 24 जनवरी को होगी। रामपाल ने अपनी याचिका में गीता के प्रचार के लिए 95 करोड़ की राशि खर्च किए जाने पर सवाल उठाया था। शुक्रवार को रामपाल की तरफ से मामले में गुड़गांव निवासी संदीप कुमार को एक अन्य याची बनाने की अर्जी दायर की गई।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर रामपाल की तरफ से दायर याचिका पर ही सवाल खड़े करते हुए पूछा था कि हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना का आरोपी ऐसा व्यक्ति, जो जेल में है- क्या वह जनहित याचिका दायर करने का अधिकारी है या नहीं।
इसके बाद ही शुक्रवार को रामपाल ने एक अन्य व्यक्ति को याची बनाने की अर्जी दी। मामले में हरियाणा सरकार का पक्ष एडवोकेट जनरल ने रखा। कहा कि इससे पहले भी कई बार गीता जयंती महोत्सव के आयोजन हुए हैं। यह सिलसिला साल 1999 से यह चल रहा है।
यह कोई धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नही हैं, इसके जरिये कुरुक्षेत्र और महाभारत से जुड़े इतिहास को प्रमोट किया जा रहा है। इसका आयोजन सरकार नहीं, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड करवा रहा है। देश में इस तरह के कई कार्यक्रम होते रहते है।