नए साल में शहरवासियों को यह सुविधा नहीं मिलेगी। यूटी प्रशासन ने इस सुविधा को बंद करने का निर्णय किया है। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने ऊबर, मेरू और टैक्सी फॉर श्योर कंपनियों को सोमवार को नोटिस जारी कर दिया। एसटीए ने तीनों कंपनियों को 30 दिन का समय दिया है।
एसटीए ने कहा कि यदि 30 दिनों में ये कंपनियां अपनी सर्विसेज को एप बेस्ड से रेडियो टैक्सी में कनवर्ट नहीं किया तो उन्हें परमानेंट बंद कर दिया जाएगा। शहर में इस समय 200 से ज्यादा एप बेस्ड टैक्सियां हैं।
हालांकि, एसटीए ने 11 दिसंबर को इनकी सर्विसेज कुछ समय के लिए सस्पेंड कर दी थीं। एसटीए का कहना है कि शहर में सिर्फ अधिकृत रेडियो टैक्सी ही चल सकेंगी। शहर में एसटीए की मंजूरी से 200 से ज्यादा रेडियो टैक्सी चल रही हैं।
ये है रेडियो टैक्सी सर्विस
- 2006 में चंडीगढ़ में लागू हुई ये सर्विस
- टैक्सी के रेट स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी लागू करेगी
- चंडीगढ़ में 23 रुपये प्रति किमी है किराया
- कंपनी के पास मिनीमम 50 और मैक्सीमम 100 गाड़ियां होनी चाहिए
- टैक्सियों में जीपीएस सिस्टम लगा होना चाहिए
- टैक्सी में फेयर मीटर लगा होना चाहिए
- ड्राइवर की पूरी प्रोफाइल कंपनी के पास हो
ओला कैब के होंगे चालान
एसटीए के एडिशनल सेक्रेटरी राजीव तिवारी ने कहा कि बैन के बाद भी ओला कैब शहर में चल रही हैं। इन टैक्सियों के अब चालान किए जाएंगे।
सभी एप बेस्ड कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्हें 30 दिनों का समय दिया गया है। इस दौरान यदि उन्होंने अपनी सर्विसेज रेडियो टैक्सी में कनवर्ट नहीं की तो उन्हें परमानेंट बंद कर दिया जाएगा।
राजीव तिवारी, एडिशनल सेक्रेटरी, स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी