चंडीगढ़। कोरोना के चलते बंद शहर की अपनी मंडी 10 माह बाद खुलने जा रही है। प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के निर्देश पर एक फरवरी से अपनी मंडी लगना शुरू हो जाएगी। निगम ने जिन अतिरिक्त वेंडरों को पर्ची दी थी, अब उन्हें हटा दिया जाएगा। हालांकि अभी डे-मार्केट नहीं लगेंगी। निगम ने सभी सेक्टरों की व्यवस्था देखना शुरू कर दिया है।
कोरोना महामारी के बाद प्रशासन ने अप्रैल 2020 से अपनी मंडी व डे मार्केट के संचालन पर रोक लगा दी थी। बापूधाम में बढ़ते कोरोना के मरीजों को देखते हुए सेक्टर-26 मंडी में फुटकर बिक्री पर भी रोक लगा दी थी। हालात बिगड़े तो मंडी को सेक्टर-17 स्थित बस स्टैंड में स्थानांतरित कर दिया गया। इस दौरान लोगों तक फल व सब्जी पहुंचाने के लिए सीटीयू की बसों का सहारा लिया गया। बसों में फल व सब्जी भरकर निगमकर्मियों ने सेक्टरों में लोगों तक पहुंचाया गया। स्थिति में सुधार आने पर मंडी को फिर से सेक्टर-26 में स्थानांतरित कर दिया गया। अब हालात धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं तो अपनी मंडी के संचालन का फैसला लिया गया है।
रेहड़ी फड़ी वालों की मनमानी के बाद उठाई थी मांग
सीटीयू की बसों का संचालन बंद होने के बाद सेक्टरों में फल व सब्जियों के वितरण के लिए रेहड़ी व फड़ी वालों को नगर निगम ने पर्चियां काटकर अनुमति दी थी। इस दौरान कुछ रेहड़ी फड़ी वाले सब्जी मंडी से सस्ती दरों पर फल व सब्जी लेकर सेक्टरों में मंहगे दामों में बेचते थे। मौसमी फल व सब्जी के दामों में तेजी से लोगों में काफी नाराजगी थी। स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए ने पार्षदों से मांग की कि अब अपनी मंडी शुरू कर देनी चाहिए। उसके बाद प्रशासन ने अपनी मंडी के संचालन की अनुमति दे दी है।
रोजगार छीना तो निगम ने पर्ची काटकर दिया था सहारा
महामारी के दौरान लॉकडाउन में सभी व्यवसाय बंद हो गए। ऐसे में बेसहारा लोगों को सेक्टरों में फल व सब्जी बेचने के लिए निगम ने पर्चियां काट दी थीं, ताकि लोगों की रोजी रोटी चलती रहे। उसके बाद नगर निगम आयुक्त ने अपनी मंडी शुरू न होने तक यह व्यवस्था लागू रहने की प्रशासक से अपील की थी। अब जब अपनी मंडी शुरू हो रही है, इसलिए अतिरिक्त वेंडरों को हटा दिया जाएगा।
कोट..
प्रशासन से अनुमति के बाद अपनी मंडी के संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। मेरा प्रयास रहेगा कि सामाजिक दूरी का पूरा पालन हो ताकि महामारी में किसी को कोई समस्या न हो। इसके लिए एक्सईएन को जिम्मेदारी दी गई है।
-केके यादव, नगर निगम आयुक्त