चंडीगढ़। 80 हजार रुपये रिश्वत मामले में आरोपी चंडीगढ़ प्रशासन के फरार ड्रग कंट्रोल अधिकारी सुनील चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी की मांग जिला अदालत ने रद्द कर दी है। शुक्रवार को अदालत ने फैसला दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं। वहीं मामले की जांच जारी है। उससे पूछताछ की जानी है। ऐसी संभावना है कि यह जमानत मिलने पर आरोपी जांच को प्रभावित कर सकता है। 47 वर्षीय आरोपी की यह पहली जमानत अर्जी थी। चंडीगढ़ विजिलेंस ने बीते 27 सितंबर को मामले में भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत यह मामला दर्ज किया था। जमानत अर्जी में आरोपी के वकील ने कहा था कि सुनील चौधरी को झूठा फंसाया गया है। उनका वर्ष 2000 में नियुक्ति के समय से बेदाग सर्विस रिकाॅर्ड है। वहीं, सरकारी पक्ष ने पेश दलीलों में कहा था कि कहा कि फरार आरोपी सुनील चौधरी द्वारा शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगने के पर्याप्त सबूत हैं। सुनील चौधरी और अशोक कुमार नरूला के नजदीकी रिश्ते भी सामने आए हैं। इनके मोबाइल नंबरों पर बातचीत का हवाला दिया गया है। वहीं सरकारी अस्पताल सेक्टर 16 के एक कर्मी के बयानों का हवाला दे कहा गया कि अशोक नरूला अक्सर बार-बार सुनील चौधरी के दफ्तर आता था। शिकायतकर्ता की दुकान के निरीक्षण वाले दिन भी दोनों साथ थे। आरोप के मुताबिक सुनील चौधरी दवाइयों की दुकानों का निरीक्षण करता था और दुकान को सील करने के नाम धमकाते हुए अशोक नरूला की मदद से रिश्वत की मांग की जाती थी।इसलिए चाहिए रिमांड
कहा गया कि मामले में सुनील चौधरी का रिमांड चाहिए ताकि सीडीआर, व्हाट्सएप कॉल डाटा, सेल फोन की विशेषज्ञ रिपोर्ट से जुड़ी जांच आदि को लेकर पूछताछ की जा सके। वहीं यह भी पता लगाना है कि पहले इस प्रकार के कितनी डील हुई थी ताकि अन्यों की भूमिका का भी पता लगाया जा सके।
25 हजार रुपये रिश्वत ली थी
बता दें कि मामले में पुलिस ने फरार अधिकारी के साथी अशोक कुमार नरूला को गिरफ्तार किया था। देवी शरण नामक दुकानदार की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ था। उनकी धनास में आर्थोपेडिक सर्जिकल की दुकान है। उनकी दुकान पर दोनों आरोपी आए थे और कुछ कथित कमियों के चलते दुकान सील करने की धमकी दे एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। 80 हजार रुपये में डील तय हुई और 25 हजार रुपये रिश्वत लेते नरूला को गिरफ्तार किया गया था। वहीं सुनील चौधरी फरार हो गया था।