चंडीगढ़। ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कोविड शील्ड के पीजीआई में चल रहे मानव परीक्षण से पहले सिरो जांच के दौरान पांच लोगों में एंटीबॉडीज मिले हैं। 59 स्वयंसेवकों और सात स्वास्थ्य कर्मियों की जांच के दौरान सीरो सर्वे में यह परिणाम सामने आए। इससे यह साफ पता चलता है कि यह सभी पांचों लोग कोरोना की चपेट में आए थे लेकिन उन्हें अपने संक्रमित होने की जानकारी नहीं हुई थी।
पीजीआई के विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के लक्षणों के सामने नहीं आने से इन लोगों को पता ही नहीं चला कि वो संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि इस बीच उनके शरीर में एंटीबॉडी बन गई। इन पांचों लोगों के शरी में एंटीबॉडी मिलने के कारण उन्हें परीक्षण में शामिल नहीं किया गया। वहीं दूसरी तरफ, पीजीआई में कोरोना के ठीक हो चुके मरीजों का प्लाज्मा लेकर संक्रमितों के इलाज का क्रम जारी है। इसके लिए वायरोलॉजी विभाग ने ऐसे 80 लोगों की जांच की है।
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि इनमें से 66 लोगों में कोरोना से ठीक होने से पहले ही एंटीबॉडी बननी शुरू हो गई थी। यानी 80 में से 82.5 प्रतिशत (66) लोगों में कोरोना से ठीक होने से पहले ही एंटीबॉडी बननी शुरू हो गई थी, जो कोरोना के इलाज के लिए एक सकारात्मक परिणाम की ओर संकेत कर रहा है। वायरोलॉजी विभाग की प्रो. मिनी पी सिंह का कहना है कि जांच के दौरान 66 में से पांच लोगों में एंटीबॉडीज के मिलने से यह पता चलता है कि स्वस्थ आबादी के बीच में कोरोना का व्यापक संक्रमण नहीं हुआ है।