चंडीगढ़। शहर के सरकारी स्कूलों में सफाईकर्मी की नौकरी पर रखकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये ठगने के मामले में अब नया खुलासा हुआ है। राम दरबार निवासी आरोपी ठेकेदार राजीव उर्फ राजू ने स्कूलों में केवल सफाईकर्मी ही नहीं फर्जी कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी देकर भी लोगों से मोटी रकम रिश्वत के रूप में ली थी। ऐसे कई लोग अब सामने आए हैं। इससे शहर के सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है। बुड़ैल के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में राजेंदर 15 दिनों से कंप्यूटर ऑपरेटर का काम कर रहे थे। रोज सुबह सात बजे से तीन बजे की शिफ्ट में कंप्यूटर शिक्षक के निर्देश पर वह रजिस्टर से बच्चों का डाटा एक्सएल शीट पर अपलोड करते थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनकी नौकरी फर्जी है। उन्हें ठेकेदार राजीव ने ठग लिया है। उन्होंने नौकरी के लिए जनवरी माह में ठेकेदार राजीव को दो किस्तों में 62 हजार रुपये दिए थे। अप्रैल में ठेकेदार राजीव ने जीएमएस-बुडै़ल में उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी ज्वाइन के लिए भेजा। राजेंदर जब स्कूल के गेट पर पहुंचे तो गेटकीपर उन्हें स्कूल इंचार्ज के पास ले गया। स्कूल इंचार्ज ने उन्हें कंप्यूटर शिक्षक से मिलवाया। कंप्यूटर शिक्षक ने राजेंदर को काम समझा दिया और वह काम पर लग गए।
राजेंदर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, उनके जैसे कई लोगों को ठेकेदार राजीव ने कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अन्य नौकरियों पर शहर के सरकारी स्कूलों में रखवा दिया और इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। खास बात यह है कि आरोपी ठेकेदार ने कई और लोगों को नौकरी पर रखवाने का आश्वासन दिया था। सफाईकर्मी की नौकरी के लिए वह 40 हजार और कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी के लिए प्रति व्यक्ति से 60 हजार रुपये वसूलता था।
केवल धनास के थाने में ही 55 लोगों ने इस फर्जीवाड़े के मामले में शिकायत दी है। इसके अलावा मौलीजागरां, विकास नगर, रामदरबार, सारंगपुर, मोहाली के छह फेज, सेक्टर-56, नयागांव आदि इलाकों से लोगों के साथ ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। स्कूलों में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपी ठेकेदार राजीव को बीते मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया था। उधर, शिक्षा विभाग ने आनन-फानन इस मामले में 10 स्कूल प्रमुख को निलंबित कर दिया था और एक प्रधानाचार्य को वापस उनके मूल राज्य पंजाब भेज दिया था। मामले में पुलिस की जांच जा रही है। वहीं, शिक्षा विभाग ने अपने स्तर पर जांच के लिए एक समिति का गठन किया है।
कॉलोनियों व पेरिफरी के जरूरतमंदों को बनाया शिकार
ठेकेदार राजीव ने इस फर्जीवाड़े के लिए कॉलोनियों व पेरिफेरी के बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाया। उसने ऐसी योजना बनाई कि किसी को भी फर्जी की नौकरी पर शक नहीं हुआ। वर्ष 2023 में उसने सबसे पहले कॉलोनियों में सरकारी नौकरी दिलवाने की बात फैलाई। इसमें उसका साथ एक महिला ने दिया। डीसी रेट पर नौकरी पर लगवाने के नाम पर उसने पढ़े-लिखे और अनपढ़ सभी लोगों से मोटे पैसे वसूले। फिर शुरू हुआ भर्ती का खेल। सरकारी स्कूलों के प्रिसिंपलों से मिलकर उसने स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं के नाम पर उन्हें आसानी से अपने जाल में फंसा लिया और सफाईकर्मी की नौकरी पर लोगों को रखवाने लगा। काम करने वालों को वह थोड़े-बहुत पैसे देता रहा। लोगों को स्कूल में काम करते देख दूसरे लोगों को भी राजीव पर शक नहीं हुआ। जो भी नौकरी के लिए पहुंचा, राजीव ने किसी को मना नहीं किया।
जीएमएचएस धनास आरसी-1 में रोज लगती थी उपस्थिति
फरवरी माह से जीएमएचएस धनास आरसी-1 में बतौर सफाई कर्मचारी काम कर रहे शिवम ने बताया स्कूल आने और जाने पर एक कर्मचारी उनकी रोज फोन में फोटो लेकर उपस्थिति लगाता था। इवनिंग शिफ्ट में उसके अलावा आठ और महिला सफाईकर्मी काम पर लगी थीं। शिवम ने लगातार तीन महीने स्कूल के सभी पुरुष शौचालयों की सफाई की। मार्च माह में वेतन नहीं मिलने पर उसे लगा कि वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग का महीना है इसीलिए देरी हो रही है। अप्रैल माह के अंत तक भी जब पैसे नहीं मिले तो उन्हें थोड़ी शंका हुई। 27 अप्रैल को सभी सफाईकर्मियों ने स्कूल प्रमुख से बात की तो उन्होंने कहा कि वह लोग उनके अंडर में नहीं, ठेकेदार को ही वेतन का पता होगा। इस पर कर्मचारियों ने यूनियन लीडर रणजीत मिश्रा से संपर्क किया, जिसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
उधार लेकर दो किस्तों में दिए थे 40 हजार : सुमन
पांचवीं पास खरड़ निवासी सुमन देवी ने बताया धनास में अपने माता-पिता से मिलने आने पर उन्हें सरकारी स्कूलों में नौकरी लगने का पता चला। पति मजदूरी से तीन बच्चों और उनका गुजारा चला रहे थे। ऐसे में जब 17 हजार रुपये की नौकरी मिलते देख, उन्होंने उधार लेकर दो किस्तों में 40 हजार रुपये दिए ताकि ठेकेदार नौकरी लगवा दे। उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने उन्हें कहा था कि 17 हजार तनख्वाह होगी और दो हजार रुपये पीएफ कटेगा। जब धनास स्मॉल फ्लैट कॉलोनी में मोहल्ले की अन्य महिलाओं को भी नौकरी के लिए आवेदन करते देखा तो ठेकेदार पर शक नहीं हुआ। अब न तो नौकरी है न पैसे।
कोट
अभी तक 100 से अधिक सफाई कर्मचारियों के वकालतनामे पर हस्ताक्षर करवा चुका हूं। इन सबके साथ सरकारी स्कूलों में नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है। अभी भी रोजाना इस फर्जीवाड़े के शिकार लोग शिकायत लेकर आ रहे हैं। लोगों की बढ़ती संख्या देखकर लग रहा है कि ठगी का यह खेल तीन करोड़ रुपये से ऊपर का है।
- रणजीत मिश्रा, अध्यक्ष, यूटी चंडीगढ़ सबॉर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन