कांग्रेस ने पंजाब की बची हुई तीनों सीटों का सस्पेंस मंगलवार शाम खत्म कर दिया। आनंदपुर साहिब के निवर्तमान सांसद रवनीत बिट्टू को लुधियाना से टिकट दिया है।
जालंधर के निवर्तमान सांसद महिंदर सिंह केपी को होशियारपुर से लड़ाया जाएगा। उनकी जगह जालंधर से चौधरी संतोख को मैदान में उतारा है।
लुधियाना से मनीष तिवारी पहले ही मना कर चुके थे, होशियारपुर की निवर्तमान सांसद संतोष चौधरी को टिकट न देकर संगठन में एडजस्ट किया जाएगा।
कांग्रेस ने पहले बिट्टू को आनंदपुर साहिब से टिकट दिया था। उसके बाद अचानक आलाकमान ने फैसला बदलते हुए अंबिका सोनी को आनंदपुर साहिब से मैदान में उतार दिया।
टिकट कटने के बाद बिट्टू नाराज हो गए, फिर टिकट के लिए लॉबिंग की। इस बीच पार्टी लुधियाना सीट से किसी हिंदू नेता को लड़ाने पर विचार करने लगी।
इसके लिए सुरिंदर सिंगला, फिर विजय इंदर सिंगला और उसके बाद एयरटेल के राकेश भारती मित्तल के नाम पर विचार भी हुआ। मित्तल को टिकट देने का पार्टी ने मन भी बना लिया था सोमवार रात मित्तल ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया।
इसके बाद टिकट बिट्टू को दिया गया। लुधियाना बिट्टू के दादा पूर्व सीएम स्व. बेअंत सिंह का गढ़ रहा है। इसलिए उन्हें टिकट दिया गया।
जालंधर से महिंदर केपी का जबरदस्त विरोध देखते हुए उन्हें होशियारपुर से लड़ाने की तैयारी थी, लेकिन वह इसके लिए राजी नहीं थे। इस फेर में दोआबा की दोनों सीटें अटकी हुई थीं।
केपी के अलावा दूसरी सीट पर चौधरी संतोख या उनके बेटे बिक्रम चौधरी का नाम फाइनल हो ही चुका था। केपी के मानने के बाद उन्हें होशियारपुर भेजा गया, जबकि जालंधर से चौधरी संतोख को उतारा गया है। संतोख इस हलके की एक विधानसभा सीट से मामूली अंतर से हारे थे।