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Chandigarh News: नाराज लक्ष्मी ने नहीं खोले भगवान के लिए मंदिर के पट

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चंडीगढ़। सेक्टर-31 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ की पावन बहुडा यात्रा श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक परंपराओं के बीच संपन्न हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर भगवान की अगवानी की और पूरे मार्ग पर जय जगन्नाथ के जयघोष गूंजते रहे। शाम 5 बजे के बाद यात्रा शुरू हुई। रथ को फल मालाओं से सजाया गया था। रथ के आगे बैंड बाजे बजाए जा रहे थे। गर्मी और उमस से भरे मौसम की परवाह भी न करते हुए श्रद्धालु बड़े रस्से से पूरी श्रद्धा के साथ बड़ा सा रस्सा खींच रहे थे। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जय जगन्नाथ के जयघोष लगाते रहे। मंदिर समिति के पदाधिकारियों, ट्राइसिटी से पहुंचे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लिया। मंदिर पहुंचने पर भगवान की विशेष पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में ओडिशा की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की भव्य झलक देखने को मिली। यात्रा सेक्टर 31 सी और डी से होते हुए वापस मंदिर में पहुंची। मंदिर का संचालन करने वाली उत्कल सांस्कृतिक संघ के सांस्कृतिक सचिव अनिल मलिक ने बताया कि बहुडा यात्रा से पहले मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन किया गया। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर यात्रा आरंभ की गई। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ वार्षिक रथ यात्रा के दौरान नगर भ्रमण करते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचे थे। नौ दिन के प्रवास के बाद शुक्रवार को बहुडा यात्रा के माध्यम से भगवान अपने मूल मंदिर लौटे। इस अवसर पर भगवान के स्वागत से जुड़ी प्राचीन धार्मिक परंपरा का भी निर्वहन किया गया। मान्यता के अनुसार, भगवान के लंबे समय तक बाहर रहने से माता लक्ष्मी उनसे नाराज हो जाती हैं और मंदिर के पट नहीं खोलतीं। इसके बाद भगवान की ओर से माता लक्ष्मी को आभूषण, फल और प्रसाद अर्पित कर उन्हें मनाया जाता है। माता लक्ष्मी के प्रसन्न होने के बाद मंदिर के पट खोले जाते हैं और भगवान का विधिवत स्वागत किया जाता है। इस परंपरा को श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ देखा। अनिल मलिक ने बताया कि मीनू रानी साहू ने लक्ष्मी बन लक्ष्मी जी की मूर्ति लेकर इस धार्मिक कार्य किया संपन्न किया।
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