चंडीगढ़। गर्भावस्था के दौरान अगर महिला में हृदयरोग या ऐसी अन्य समस्याओं का पता चले तो उसकी जानकारी शुरुआती दौर से ही बेहोशी के डॉक्टर को भी देनी चाहिए क्योंकि ऐसे केस में डिलीवरी के दौरान अचानक से समस्या पता चलने पर कई बार समस्या हो सकती है। स्त्रीरोग विशेषज्ञों की ही तरह ऐसे मामलों में बेहोशी के डॉक्टर की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह बातें पीजीआई के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. काजल जैन ने एब्स्ट्रेक्ट एंड गाइनकोलॉजिकल सोसाइटी के वार्षिक सम्मेलन में कहीं।इस दौरान विशेषज्ञों ने एक महिला के जीवन के विभिन्न चरणों में हार्मोनल बदलाव पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इसके कारण असामयिक यौवनावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति जैसे स्वास्थ्य से जुड़े बदलाव हो सकते हैं। दिल्ली एम्स की प्रो डॉ. जेबी शर्मा ने गर्भावस्था में आयरन के महत्व को बताया। वहीं, पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की पूर्व प्रमुख डॉ. वनिता सूरी ने संचार कौशल पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार चिकित्सक को रोगियों का विश्वास और अनुपालन जीतना होता है। यह डॉक्टर-रोगी संबंध को स्वस्थ बनाने में मदद करता है। सम्मेलन ने कई उभरते प्रसूति विशेषज्ञों को एक प्रतिष्ठित मंच पर अपना शोध कार्य प्रस्तुत करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एससी साहा ने की। आयोजक सचिव डॉ. मिनाक्षी रोहिल्ला थीं।