कोरोना काल में चंडीगढ़ के राजेश बत्रा ने कुछ ऐसा किया कि उनके नाम एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया। निराश हो चुके आर्टिस्ट को उन्होंने एक नई राह दिखाई और 100 देशों के 2800 कलाकारों को एक मंच पर लेकर आए। इस कार्यक्रम को विश्व के सबसे बड़े ऑनलाइन क्रिएटिविटी इवेंट का टाइटल मिला। साथ ही वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड लंदन से इसके लिए सर्टिफिकेट भी मिल चुका है।
राजेश ने बताया कि लॉकडाउन से सबसे ज्यादा नुकसान आर्टिस्ट को हुआ। आर्ट गैलरी बंद थी। आइडियाज एक्सचेंज नहीं हो रहे थे। आर्टिस्ट में निराशा भर रही थी। तभी फैसला लिया गया कि कला की दुनिया के लिए कुछ अलग करना चाहिए।
कोरोना काल में ऑनलाइन ही सबसे सशक्त माध्यम था। इसी को हथियार बनाया और एक डिजिटल मंच तैयार किया। डिजाइनिंग और प्रिंटिंग के माहिर राजेश ने अपनी टीम के साथ मिलकर कलाकारों के लिए थ्री डी वर्चुअल रूम तैयार किया। सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर से कलाकारों से आर्ट वर्क मंगवाए और नवंबर महीने में इसका आयोजन किया।
यह पहली बार था कि जब एक साथ इतने ज्यादा आर्ट वर्क की डिजिटल प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें चंडीगढ़ के 150 कलाकारों ने हिस्सा लिया। ऑनलाइन प्रदर्शनी के माध्यम से कलाकारों को अपने काम को बेचने के लिए भी एक मंच मिल गया। गैलरी में किसी भी फोटो पर क्लिक करने पर साइड स्क्रीन पर कलाकार की पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके साथ ही उससे सीधा संपर्क भी हो जाता है। जिससे आर्ट लवर सीधा कलाकार से ही उसके काम को खरीद सकता है।
एग्जिबिशन के जरिए कई कलाकारों की एक से ज्यादा प्रतियां बिकी। राजेश बत्रा ने बताया कि कई कलाकारों ने उन्हें निजी तौर पर लॉकडाउन के समय मे उनकी कला को एक मंच देने के साथ और कस्टमर उपलब्ध करवाने के लिए टीम को शुभकामनाएं दी। बत्रा ने बताया कि उनकी खुद की कंपनी छपाई डॉट कॉम का काम भी लॉकडाउन में बहुत प्रभावित हुआ, क्योंकि प्रिंटिंग बंद हो गई थी। इस एग्जिबिशन से उनकी पुरानी कंपनी को भी प्रमोशन हुआ।