दशहरे के दिन अमृतसर में ट्रेन हादसे में मारे गए 59 लोगों की मौत के बाद जिला और रेल प्रशासन मुस्तैद हो चुका है। सोमवार को जोड़ा फाटक पर रेलवे और पंजाब पुलिस का कड़ा पहरा रहा। फाटक बंद होते किसी व्यक्ति को पैदल तक गुजरने की इजाजत नहीं थी।
यही मुस्तैदी दशहरे के दिन दिखाई गई होती है, तो 59 लोग जिंदा होते। हादसे के चार दिन बीत जाने के बाद यह पता नहीं चल सका है कि इनकी मौत का जिम्मेदार कौन है? दशहरा मेला आयोजक इस हादसे के लिए रेल प्रशासन को जिम्मेदार बता रहे हैं, तो रेल प्रशासन इस हादसे के लिए मेला आयोजकों को जिम्मेदार बता रहा है। दशहरे के प्रबंधक कांग्रेसी काउंसिलर का बेटा था और मुख्य मेहमान कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू की पत्नी थी। इसलिए डैमेज कंट्रोल करने के लिए खुद नवजोत सिद्धू ने कमान संभाल रखी है। प्रशासनिक अधिकारी डोर टू डोर जाकर मृतकों का आंकड़ा एकत्र कर रहे हैं।
धीमी गति से निकली शताब्दी, डीएमयू की स्पीड वही रही
सोमवार को दोपहर दो बजे जोड़ा फाटक पर सबसे पहले अमृतसर शताब्दी एक्सप्रेस गुजरी। फाटक को करीब 5 मिनट पहले बंद कर दिया गया। दोनों तरफ रेलवे और पंजाब पुलिस के मुलाजिम तैनात थे। किसी व्यक्ति को पैदल तक नहीं गुजरने दिया गया। शताब्दी फाटक से लगभग 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरी। शताब्दी निकलने के बाद लोग क्रासिंग पार करने लगे। सुरक्षा में तैनात मुलाजिम ने सभी को वही रोक दिया।
दूसरी तरफ से डीएमयू के निकलने का समय हो गया था। पुरी सुरक्षा के बीच दोनों ट्रेनों के गुजरने के बाद आम पब्लिक को वहां से गुजरने दिया गया। डीएमयू की स्पीड 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार पर थी। मौके पर तैनात रेल अधिकारियों से पूछा गया, तो उनका कहना था कि इस संबंध में बड़े अधिकारी ही ज्यादा जानकारी दे सकते हैं।
रेलवे लाइन क्रासिंग के हर प्वाइंट रखे बंद
सोमवार की सुबह से जोड़ा फाटक से पहले अमरोट की तरफ जाने वाले जितने भी प्वाइंट थे, उन्हें पुलिस ने पूरी तरह से सील कर रखा था। रेलवे लाइन क्रास करना तो दूर की बात किसी को आसपास जाने की इजाजत तक नहीं थी। शॉर्ट कट रास्ते से जाने वाले लोगों को साफ आदेश थे कि वह अगर दूसरी तरफ जाने चाहते है तो रेलवे फाटक से गुजरे या फिर सही रास्ते से जाएं।