सरेआम इस तरह किए गए ग्रेनेड हमले ने पंजाब पुलिस के खाते में एक और नाकामी लिख दी है। क्योंकि आतंकी हथियार लेकर आए और अपना काम करके भाग निकले। हाईअलर्ट था, चप्पे-चप्पे पर चेकिंग चल रही थी। क्या कर रही थी पुलिस। लोगों के लिए तो अलर्ट जारी कर दिया, पर खुद रही नहीं। नतीजा ये निकला कि इस घटना ने प्रदेश में आतंकवाद के दोबारा लौटने की आशंका को और बल दे दिया है।
हालांकि, इस हमले में किसी कट्टरपंथी सिख संगठन की कम और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका ज्यादा लग रही है। निरंकारी भवन पर हुए हमले को लेकर इंटेलिजेंस विंग की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि हमलावरों ने काफी समय तक इस इलाके की रेकी की और हमला उस समय किया गया जब भवन में काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। हालांकि अभी तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इंटेलिजेंस विंग का मानना है कि निरंकारी भवन पर हमले से आम लोगों में दहशत पैदा करने की कोशिश की गई है। इससे हमलावरों ने खुफिया एजेंसियों का ध्यान भटकाने की भी कोशिश की है।