जिस तनाव की आशंका पिछले साल पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व क्रिकेटर और नेता नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद जताई जाने लगी थी, इन दिनों वैसे ही हालात बनते दिखाई देने लगे हैं।
पंजाब में नगर निगम चुनाव के बाद कांग्रेसी मेयरों के चयन, खासकर अमृतसर नगर निगम के मेयर चुने जाने में तवज्जो न मिलती देख सिद्धू मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से खफा नजर आ रहे हैं। यह सोमवार को अमृतसर में दिए उनके बयानों से साफ नजर आ रहा है।
मेयरों के चयन का जिम्मा सूबे के पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ को सौंपा गया है। यह पैनल पटियाला, जालंधर और अमृतसर नगर निगमों के लिए मेयर का चुनाव करेगा। यानी कैप्टन ने पैनल में सिद्धू को जगह नहीं दी है और न ही अमृतसर निगम के मेयर के चयन में उनसे राय ली गई है। कुल मिलाकर कैप्टन ने इस मामले से सिद्धू को दूर ही रखा है। इस संबंध में अमृतसर में मीडिया के सवालों पर सिद्धू अपनी नाराजगी छिपा नहीं सके।
अमृतसर मेयर के चयन से दूर रखे जाने का है मलाल
नवजोत सिद्धू
- फोटो : File Photo
सोमवार को उनसे दो सदस्यीय पैनल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि किसी पैनल के बारे में उन्हें सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने अपने ही अंदाज में यह भी कहा कि फरमान तो कैप्टन को जारी करना है। वे जिसे भी मेयर बनाएं, मंजूर होगा। इसके अलावा उन्हें मेयर के चुनाव संबंधी कार्यक्रम में भी बुलाया नहीं गया था, इसलिए वे उस कार्यक्रम में भी नहीं गए। सिद्धू ने कहा, ‘बिना बुलाए तो मैं सिर्फ दरबार साहिब, दुर्ग्याना मंदिर और बाकी धर्मस्थलों पर ही जाता हूं।’
उल्लेखनीय है कि सिद्धू अमृतसर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। ऐसे में अमृतसर नगर निगम के मेयर चुनाव से उन्हें अलग रखे जाने का मलाल उनके बयानों से साफ झलक रहा है। यही नहीं सूबे के लोकल बाडी और पर्यटन मंत्री के रूप में बीते एक साल के दौरान वे अपने विभागों से संबंधित अनेक योजनाओं की लगातार घोषणा करते रहे हैं।
लेकिन यह भी देखा गया है कि उनके द्वारा की जाने वाली अधिकांश घोषणाओं को मुख्यमंत्री लागू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। इसके अलावा उनकी अनेक योजनाएं धन के अभाव में भी शुरू नहीं हो सकी हैं। गौरतलब है कि कैप्टन सरकार के गठन के समय भी यह कयास लगाए जा रहे थे कि सिद्धू को उपमुख्यमंत्री का पद दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।