वारिस पंजाब दे प्रमुख अमृतपाल सिंह नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर युवाओं को गुमराह कर उन्हें आनंदपुर खालसा फोर्स (एकेएफ) का हिस्सा बना रहा था। नशा मुक्ति केंद्र स्वास्थ्य विभाग से मंजूर होना चाहिए और जिला प्रशासन से इजाजत लेना जरूरी होता है। मगर अमृतपाल सिंह ने अपने गांव जल्लूपुर खेड़ा के नशा मुक्ति केंद्र की सूचना न तो स्वास्थ्य विभाग को थी और न ही जिला प्रशासन को। इस नशा मुक्ति केंद्र में न तो डॉक्टर थे और न ही फार्मासिस्ट था।
ऑपरेशन अमृतपाल के बाद से लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जल्लूपुर खेड़ा गांव समेत अलग-अलग जगहों पर चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्रों की चर्चा भी खूब है। अमृतपाल सिंह नशा मुक्ति केंद्रों को युवाओं को गुमराह करने की फैक्टरी की तरह चलाता था। यहां युवाओं को नशा छुड़ाने के नाम पर दवाओं के तौर पर नशीली चीजें दी जाती थीं।
लुधियाना: दो ऑटो चालकों से पूछताछ, 50 मिनट तक सड़कों पर घूमता रहा
पंजाब से हरियाणा में प्रवेश करने से पहले अमृतपाल सिंह 18 मार्च की रात को करीब 50 मिनट तक लुधियाना की सड़कों पर घूमता रहा। सीसीटीवी फुटेज की जांच में उसे इधर-उधर जाते देखा जा सकता है। वहीं, पुलिस ने उन दो ऑटो चालकों से भी पूछताछ की है। इसके बाद ऑटो में बैठकर अमृतपाल शेरपुर तक पहुंचा था। पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि ऑटो चालकों ने अमृतपाल और पपलप्रीत को सवारी के तौर पर ही बैठाया था। वह अमृतपाल को नहीं पहचान सके।
पूछताछ के बाद दोनों ऑटो चालकों को भेज दिया गया है। हार्डीज वर्ल्ड से उसे ऑटो में बैठा जालंधर बाईपास और उसके आगे उसे शेरपुर चौक तक छोड़ने वाले ऑटो चालकों ने बताया कि उनके ऑटो में दो लोग बैठे थे लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि वह अमृतपाल और उसका साथी है। उन्होंने किराया लेकर उन्हें बताई जगह तक छोड़ दिया।
बस से हरियाणा में दाखिल हुआ
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार अमृतपाल सिंह नौ बजकर बीस मिनट से 10 बजकर 10 मिनट तक लुधियाना में रहा। उसने पहला ऑटो हार्डीज वर्ल्ड से लिया और जालंधर बाईपास पहुंचा। इसमें उसे 20 मिनट लगे। इसके बाद दूसरा ऑटो लेकर वह शेरपुर तक पहुंचा। इसमें उसे 30 मिनट के करीब का समय लगा। बाद में वह बस से हरियाणा में दाखिल हुआ।