महंगी दवाओं के बोझ से दबे मरीज को राहत देने के लिए पीजीआई में एफॉर्डेबल मेडिसीन्स एंड रिलाएबल इम्प्लांट्स फॉर ट्रीटमेंट (अमृत) फार्मेसी स्थापित की जा रही है।
इसमें कैंसर, हृदय रोग से संबंधित दवाएं और उनके इम्प्लांट बाजार से काफी सस्ते रेटों पर मिलेंगे। यह देश का दूसरा फार्मेसी होगा। पहला फार्मेसी आउटलेट बीते साल नवंबर में एम्स में खुला था। दावा किया गया है कि इस फार्मेसी में बाजार से करीब 50 प्रतिशत रेटों से सस्ती दवाएं मिलेंगी। पीजीआई में इसके लिए तैयारी भी शुरू हो चुकी है। नेहरू हास्पिटल में अमृत फार्मेसी को खोलने के लिए जगह दे दी गई है।
इन मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा
अमृत प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि फार्मेसी आउटलेट में कैंसर की 202 की दवाएं, 186 कार्डियोवस्कुलर ड्रग्स और 148 कार्डियक इम्प्लांट बहुत ही सस्ते रेटों पर मिलेंगे। इसमें ऑर्थोपीडिक इम्प्लांट भी मिलेंगे, लेकिन इसका खास फोकस कैंसर की दवाओं पर रहेगा।
डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल कैंसर की मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। करीब डेढ़ लाख महिलाओं में सालाना ब्रेस्ट कैंसर डाइग्नोज हो रहा है। इनमें आधे से ज्यादा लोग महंगी दवाओं के कारण हास्पिटल जाना बंद कर देते हैं।
ऐसे समझें कैसे मिलेगा फायदा
जानकारों के मुताबिक कीमोथैरेपी के दौरान प्रयोग में आने वाली कई दवाएं ऐसी हैं, जिनका एमआरपी रेट काफी ज्यादा है, जबकि उन दवाओं की लागत काफी कम है। उदाहरण के तौर पर डोसेटैक्सल 120 एमजी का इस्तेमाल कीमोथैरेपी में होता है। इसका एमआरपी रेट करीब 13,440 रुपये है, जबकि अमृत फार्मेसी इसे करीब 900 रुपये में बेचेगा। इसी तरह से कोबोप्लेटिन 450 एमजी का एमआरपी 2561.57 रुपये है, जो इस फार्मेसी में 1,316.25 रुपये में मिलेगा।
क्या सपना होगा साकार
मरीजों को सस्ते रेट पर दवाएं मिलेंगी, यह मरीजों के लिए एक सपना है, लेकिन क्या यह सच हो पाएगा। दरअसल सवाल इसलिए पैदा हो रहे हैं क्योंकि पहले भी सरकार व पीजीआई की ओर से कई प्रयास किए गए, लेकिन अब तक कोई योजना जमीनी तौर पर सफल नहीं हो पाई।
पीजीआई ने दो साल पहले ब्रांडेड दवाओं पर 50 प्रतिशत छूट देने के लिए शॉप अलॉट की थी, लेकिन मरीजों को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचा। इसी तरह से पीजीआई खुद अपनी फार्मेसी खोलने की योजना पर भी पिछले डेढ़ साल से काम कर रहा है, लेकिन अब भी इसमें कम से कम छह महीने का वक्त लगेगा।