गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ सीएम अमरिंदर सिंह
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सामने हुई बैठक में पानी के साथ पावर (बिजली) भी मुद्दा बन गया। हरियाणा इस बात को लेकर सहमत नहीं है कि पंजाब जो पावर प्रोजेक्ट लगाए, उसमें से बिजली का लाभ सिर्फ पंजाब को ही मिले। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियाें की अपना राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए बयानबाजी चल ही रही थी कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक नया दांव चल दिया।
कैप्टन ने कहा कि एसवाईएल का निर्माण हो जाने से दक्षिणी पंजाब के दस लाख एकड़ क्षेत्र में सूखा पड़ने की आशंका है। अगर ऐसा हो गया तो राज्य में आतंकवाद फिर सिर उठा सकता है, जो एक राष्ट्रीय समस्या है। कैप्टन ने कहा कि हरियाणा के पास जमीन चाहे कम है, लेकिन पंजाब के पुनर्गठन के मौके पर इस राज्य को पानी पहले ही अधिक दे दिया गया, जबकि पंजाब को यमुना का कोई हिस्सा नहीं दिया।
कैप्टन के इस नजरिये पर कड़ा एतराज जताते हुए बैठक में मौजूद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा पानी की कमी वाला राज्य है। प्रदेश में पानी की मांग 36 मिलियन एकड़ फुट है, जबकि पानी की उपलब्धता 14.7 मिलियन एकड़ फुट है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में हमें यमुना नदी के अपने हिस्से में से दिल्ली को अतिरिक्त पानी देना पड़ रहा है, जबकि पंजाब रावी-ब्यास के पानी में से हरियाणा का पूरा हिस्सा नहीं दे रहा है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि हरियाणा के हजारों गांव और लाखों हेक्टेयर भूमि, पंजाब से हमारे हिस्से का पानी न मिलने के कारण आज भी पानी से वंचित है।
हरियाणा सहमत नहीं
हरियाणा पंजाब सरकार के इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं है कि भाखड़ा मेनलाइन नहर पर निवेश केवल उनके द्वारा किया जाए और उससे पैदा होने वाली बिजली का उपयोग केवल पंजाब ही करे। उन्होंने केंद्र सरकार से यमुना नदी पर रेणुका, किसाऊ और लखवार-व्यासी बांधों के निर्माण कार्य में तेजी लाने का आग्रह भी किया।