पूर्व सीएलपी लीडर और मौजूदा प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील जाखड़ की नाराजगी कांग्रेस केलिए चिंता का सबब बन सकती है। राज्यसभा का टिकट न मिलने से नाराज जाखड़ सोमवार को अंबिका सोनी के नामांकन में भी नहीं पहुंचे। जबकि, वह चंडीगढ़ में ही थे। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सफाई दी कि कोई नाराजगी नहीं है।
कुछ समय पहले प्रदेश में बड़े फेरबदल के समय हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा केसाथ-साथ जाखड़ को भी सीएलपी लीडर के पद से हटा दिया था। तब माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है।
पंजाब से अंबिका, जाखड़ और कपिल सिब्बल का नाम चल रहा था, लेकिन हाईकमान ने पार्टी प्रधान सोनिया गांधी की करीबी अंबिका को तरजीह दी। जिससे नाराज जाखड़ नामांकन में नहीं पहुंचे, जबकि दिल्ली से लेकर पंजाब के सभी नेता मौजूद थे।
जाखड़ चंडीगढ़ स्थित गुरकीरत सिंह के निवास पर उनके भाई हरकीरत सिंह के निधन पर शोक जताने जरूर गए थे। जाखड़ ने ही कैप्टन को प्रधानगी दिलवाने को मुहिम चलाई थी, पर कैप्टन उन्हें कुछ नहीं दिला सके। इस बारे में पूछे जाने पर कैप्टन ने कहा कि अगर कोई नाराजगी होती तो जाखड़ उन्हें बताते।
जाखड़ के लिए कोशिश की गई थी, लेकिन आखिरी फैसला हाईकमान का था। हाईकमान जाखड़ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगा। किससे क्या काम लेना है, यह हाईकमान ने तय करना है।
कैप्टन ने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की हालत खराब है। माता चंद कौर की हत्या, संत रंजीत सिंह ढडरियांवाले पर कातिलाना हमला, एक कांस्टेबल की हत्या जैसी घटनाएं इसकी गवाह हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पंचायतों को बर्तन, सिलाई मशीनें, गैस स्टोव बांटने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि लोगों में बहुत गुस्सा है।
कांग्रेस ने 546 मंडियों का दौरा कर किसानों के हालात जाने हैं। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों को लेकर पार्टी राज्यपाल को मांगपत्र दे चुकी है, पर कुछ नहीं हुआ। वह भाजपा से जुड़े हैं, उन्हें पंजाब के हालात दिखाई नहीं देते।