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मतदान दिवस को मत के संग कीजिए सेलिब्रेट

Fri, 04 Apr 2014 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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‘सरफरोशी की तमन्ना जब हमारे दिल में थी, देश अपना एक था बाजुए कातिल भी थी, आजाद मैं आजाद तू, इस ख्वाब या तो तोड़ दे या डर के साए से निकल जिसमें जिए तू आज भी, उठ जाग और सबको जगा, तू है प्रबल सबको बता, मैं साथ हूं हम साथ हैं और साथ यह विश्वास भी...’।
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वाटंलियर्स की यह पंक्तियां मतदाताओं जगाने के लिए है। यह है ‘अमर उजाला’ के वोटर जागरूकता अभियान के तहत आयोजित नुक्कड़ नाटक ‘कहानी कुर्सी’ की एक कविता।

जो वोटरों को जागरूक करने के लिए वालंटियर्स ने तैयार की है।

एलांते माल में वीरवार को आयोजित इस नाटक की शुरुआत होती है बेहतरीन ढंग से। मेहरबान... कद्रदान... सलमान खान... पीपल ऑफ हिंदुस्तान... आपके सामने पेश है तड़कती भड़कती कुर्सी, जिसके लिए सबकी लार टपकती। कुर्सी आती है और गाना बजता है बिजली गिराने ये है आई कहते हैं इसको कुर्सीबाई।
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कुर्सी के पास एक अच्छा नेता आता है और गाता है किस कुर्सी तू अब तो आजा... कुर्सी इतराते हुए कहती है जाने दो ना...। फिर भ्रष्ट नेता उठता है और वह अच्छे नेता को कहता है कि यह हाथ पीछे करले ठाकुर। वोटर जागरूकता अभियान के लिए किए गए नुक्कड़ नाटक से संदेश दिया गया है कि आपका वोट कीमती है और इसे जरूर डालें और सोंच समझकर डालें। नुक्कड़ नाटक को देखने के लिए एलांते माल में जबरदस्त भीड़ इकट्ठी हुई।
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नुक्कड़ नाटक में प्रयोग की गईं कविताएं
नाम एक पहचान अनेक,
रंग रूप भाषा विवेक
हर चाल में माहिर
भ्रष्ट सदा है जगजाहिर
चाहे विचारों से गंदा है
राजनीति एक धंधा है।
दुर्भाग्य देश का है हर साल
जीत रहे गुरु घंटाल
लूट मार और अत्याचार
गुंडागर्दी है जिनका हाल
हर पांच साल के बाद जगे जनसेवक भिखमंगा है
राजनीति एक धंधा है।

देश लूटने का सदा मन में रहे विचार
जोड़ तोड़कर किसी तरह बन जाए सरकार
हर पांच साल के बाद जगे
ये भारत मां का बंदा है
राजनीति एक धंधा है।

यह हैं कलाकार
मयंक, नवनीत, चितवन, अभिनव, हिना, रशमिंदर, सुखप्रीत, कशिश और सुप्रीत ने नाटक में अहम भूमिका निभाई।
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