अमरनाथ यात्रा के लिए तीन जुलाई को रवाना हुआ जत्था बीते दिन कालका पहुंचा। जत्थे में शामिल लोगों ने बताया कि बाबा बर्फानी के दर्शन करने के बाद जब वह लौट रहे थे तो उनकी बस पर उपद्रवियों ने पत्थर बरसाए। इस कारण बस में सवार लोग बुरी तरह डरे और सहमे हुए थे।
जानकारी देते हुए विशाल शर्मा शालु, संजीव ग्रोवर, सुरेंद्र शर्मा और सुनील ने बताया कि वह निजी बस से तीन जुलाई को कालका कमेटी चौक से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुए थे। बस में 50 लोग सवार थे, इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि बाबा बर्फानी के दर्शन करने के बाद आठ जुलाई को जत्था श्रीनगर से कालका के लिए रात करीब 9:15 बजे रवाना हुआ। पांच किलोमीटर की दूरी के बाद ही उनकी बस पर उपद्रवियों ने पथराव करना शुरू कर दिया। इसके बाद रास्ते में कई बार उनकी बस पर पथराव किया गया।
20 बार बस पर फेंके गए पत्थर
अमरनाथ यात्रा
- फोटो : फाइल फोटो
लोगों ने बताया कि श्रीनगर से ब्रजवाड़ा तक करीब 20 बार उनकी बस पर पत्थर फेंके गए, जिससे कई शीशे टूट गए और कई जगह दरारें आ गईं। उन्होंने बताया कि पथराव के कारण बस में बैठे श्रद्धालु बुरी तरह डरे और सहमे हुए थे।
कई यात्री डर से कांप रहे थे। उन्होंने बताया कि इस बाबत उन्होंने वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों को भी इसकी जानकारी दी, लेकिन उनको किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया और बस को आगे निकालने की हिदायत दी। उन्होंने बताया कि ब्रजवाड़ा क्रॉस करने के बाद रात करीब 11:30 बजे वह जंगल में बस को साइड में लगाकर लाइटें बंद कर दी और सीटों के नीचे छिप गए। उन्होंने बताया कि रात करीब 1:30 जब माहौल थोड़ा शांत हुआ, तब आगे बढ़े। करीब तीन बजे जवाहर टनल क्रॉस करने के बाद सभी ने राहत की सांस ली।
उन्होंने बताया कि आठ तारीख की रात उनके लिए दहशत की रात थी। जिसे वह कभी नही भूलेंगे। उन्होंने बताया कि श्रीनगर में आलम यह था कि उपद्रवी केवल स्थानीय गाड़ियों को छोड़ सभी वाहनों पर पत्थर बरसा रहे थे। विशाल शर्मा ने बताया कि यह उनकी छठी अमरनाथ यात्रा थी। उन्होंने बताया कि इस बार का मंजर बड़ा ही खौफनाक था।