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अमर उजाला अवार्डः कांटेस्ट का आज निर्णायक दिन

Tue, 07 Oct 2014 01:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ केंद्रीय रामलीला महासभा प्रतियोगिता के अंतिम दिन ज्यूरी अपना निर्णय सुनाएगी। विजेताओं को पुरस्कार बांटे जाएंगे। ‘अमर उजाला’ की ओर से विजेताओं को पुरस्कार बांटे जाएंगे। मंगलवार को प्रतियोगिता के अंतिम दिन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस महावीर सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे।
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वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी अरविंद कुमार त्रेहण करेंगे। इसको लेकर सभी कलाकारों में उत्सुकता बढ़ गई है। चंडीगढ़ केंद्रीय रामलीला महासभा की ओर से आयोजित रामलीला प्रतियोगिता के दूसरे दिन दर्शकों की भीड़ उमड़ी। दूसरे दिन सोमवार रात को तीन सीनों का मंचन किया गया।

इसमें मंथरा-कैकेयी संवाद, भरत मिलाप और रावण-वेदवंती संवाद का मंचन हुआ। इनमें कई सीन भावुक करनेवाले थे। दूसरे दिन एस्टेट ऑफिस के तहसीलदार अमरेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।
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इस अवसर पर पार्षद गुरबख्श रावत और उनके पति बीरेंद्र सिंह रावत भी मौजूद रहे। पार्षद राजेश गुप्ता बिट्टू भी दर्शकों के बीच बैठकर रामलीला प्रतियोगिता का आनंद लिया।

पहला सीन टीम नंबर 3- मंथरा कैकेयी संवाद

सीन की शुरुआत में कैकेयी को खबर है किराम को अयोध्या का राज दिया जा रहा है। यह सुन कैकेयी प्रसन्न हो जाती हैं। दासियों को उपहार देती हैं। कैकेयी मंथरा के लिए उपहार रखती हैं। जब मंथरा पहुंचती है तो कैकेयी कहती हैं कि तुम इतनी देर से कहां थी। लेकिन, मंथरा ने हार स्वीकार नहीं की।

कैकेयी ने मंथरा से कहा कि राम तो अपनी जननी कौशल्या से भी अधिक मुझे प्यार करते हैं। इस पर मंथरा कैकेयी को समझाती हैं कि षडयंत्र के तहत राम को राज दिया जा रहा है। मंथरा कैकेयी से कहती हैं कि तुम्हें विष और अमृत में अंतर नहीं पता। मंथरा ने समझाया कि राजा कोई बने वह तो रानी नहीं बनेगी, लेकिन कैकेयी तुम दाषी जरूर बन जाओगी।

कैकेयी धीरे-धीरे मंथरा की बातों में आने लगती हैं। फिर गंभीर होकर कैकेयी ने मंथरा से कहा जरा सोच भरत राजा कैसे बने। फिर कैकेयी को दशरथ द्वारा दिए गए वरदान की याद दिलाती है। मंथरा ने कहा कि पहला वरदान यह मांगों कि भरत का राज तिलक हो और दूसरे वरदान में राम को 14 वर्षों का वनवास हो।

कैकेयी ने मंथरा से कहा यह समय मोह-ममता का नहीं है, बल्कि कूटनीति का है। मंथरा कहतीं हैं कि महाराज को इसी समय बुला और बदल दे समय की धारा को। इस सीन का अंत कोप भवन से होता है। दर्शकों की इस सीन पर कई बार तालियां बजीं।
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सीन नंबर 2-टीम नंबर 2- भारत मिलाप

प्रतियोगिता के दूसरे दिन और दूसरा सीन में भरत मिलाप का भावुक करनेवाला था। राम वन में चले आते हैं। लक्ष्मण उनकी रक्षा में बाहर हैं। अयोध्या की प्रजा के साथ भरत वन में भगवान श्रीराम को लेने जाते हैं। भरत को देख लक्ष्मण ने बाण तान दिया। फिर भगवान श्रीराम आते हैं। भगवान के आते ही भरत उनकेपैरों पर गिर पड़ते हैं।

भगवान उन्हें उठाकर गले लगा लेते हैं। गले मिलने का दृश्य लोगों को भावुक कर देता है। फिर दोनों भाइयों में वार्तालाप होता है। भरत कहते हैं कि वे अयोध्या के राजा राम को लेने आए हैं। एक राजा को प्रजा के पास ले जाने के लिए आए हैं। पुत्र को मां के पास ले जाने के लिए आए हैं।

राम राज स्वीकार कर लेते हैं और भरत से कहते हैं कि वे राज संभालें और 14 वर्षों तक राज करें। भरत कहते हैं कि अयोध्या का राज सिंहासन रिक्त रहेगा। बाद में भरत भगवान की चरणपादुका लेकर चल देते हैं। तीसरा सीन टीम नंबर चार ने रावण वेदवंती संवाद से संपन्न किया। इसमें सीन में कलाकारों के दमदार अभिनय को लोगों जमकर सराहा।
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