फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़: 2300 MSME यूनिट, 10 महीने में 248 नई यूनिट खड़ी हुईं

Fri, 19 Feb 2016 09:27 AM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़ में सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) की 2300 से अधिक यूनिट्स हैं। वर्ष 2006 में एमएसएमई एक्ट आने के बाद से जनवरी 2016 तक कई नई यूनिट शुरू हुई हैं। इनमें पिछले साल अप्रैल से अब तक 248 नई यूनिट भी शामिल हैं।
विज्ञापन


एमएसएमई एक्ट आने के बाद 1380 यूनिट्स ने खुद को एंटरप्रेन्योर मेमोरेंडम-2 में सूचीबद्घ कर लिया। वहीं, एक्ट से पहले स्मॉल स्केल इंडस्ट्री के तहत 2 हजार से अधिक यूनिटें चल रही थीं। चंडीगढ़ में एमएसएमई के तहत चल रहीं यूनिट्स में लाइट इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, स्क्रू निर्माण की यूनिटें सबसे अधिक हैं।

इसके अलावा यहां इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, आईटी, बायोटेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी, नॉलेज बेस इंडस्ट्री (बीपीओ, केपीओ), हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स, फर्नीचर, स्टील फर्नीचर, सेनेटरी फिटिंग, नट-बोल्ट निर्माण की इकाइयां हैं। इसके अलावा यहां हाईटेक, प्रदूषण रहित इंडस्ट्री, आरएंडडी ओरिएंटेड सर्विस से संबंधित कई यूनिटें काम कर रही हैं।
विज्ञापन


इंडस्ट्रियल एरिया का वर्तमान स्वरूप  
- इंडस्ट्रियल एरिया : 1475 एकड़
- 1970 में बना फेज-1 और फेज-2  
- प्रशासन ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 के लिए मौलीजागरां के 152 एकड़ जमीन को चिह्नित किया

उत्तर भारत की सबसे बड़ी स्क्रू और नट-बोल्ट इंडस्ट्री
उत्तर भारत में चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा नट-बोल्ट और स्क्रू की यूनिटें हैं। यहां सैकड़ों की तादात में एमएसएमई इनका निर्माण करते हैं। इन यूनिटों में रेलवे और ट्रैक्टर्स पार्ट्स के अलावा ऑटोमेटिव पार्ट्स भी बनते हैं। यहां बनने वाले इंजीनियरिंग पार्ट्स हिमाचल, गुड़गांव, मुंबई, चेन्नई समेत भारत के सभी बड़े औद्योगिक शहरों में सप्लाई किए जाते हैं। इनका सालाना ढाई से तीन हजार करोड़ का टर्न ओवर है।

हर काम की तय होगी समय सीमा
प्रशासन की ओर से जारी यूटी की पहली इंडस्ट्रियल पॉलिसी में कॉमन एप्लीकेशन फार्म (सीएएफ) लॉन्च करना प्रस्तावित है। इसे प्रशासन जल्द ही लॉन्च कर सकता है। इसके तहत नई यूनिट लगाने के लिए एंटरप्रेन्योर की ओर से आवेदन करने के तय समय में उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाना होता है। इसके लिए प्रशासन की ओर से लागू सिटीजन चार्टर के तहत जैसे बिजली-पानी कनेक्शन, सीवर कनेक्शन, रजिस्ट्र्रेशन, बिल्डिंग प्लान अप्रूवल, न्यू लाइसेंस या रेन्यूवल के लिए आवेदन के लिए तय दिनों में उन्हें सुविधा देनी होती है।

45 दिन में भुगतान न मिले तो ब्याज पाने के हकदार
प्रशासन ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों के सरलीकरण के लिए एक परिषद का गठन किया है। इस परिषद में लीड बैंक मैनेजर, एक वरिष्ठ एडवोकेट समेत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट शामिल होते हैं। इसके तहत किसी भी उद्यमी को अगर उसके सामान की सप्लाई पर किसी कंपनी से भुगतान नहीं मिलता है तो वह इस परिषद में शिकायत दर्ज करा सकता है। साथ ही अगर उसे 45 दिन के अंदर-अंदर भुगतान न मिला हो तो वह इस पर ब्याज के लिए भी क्लेम कर सकता है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें