चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 में तीन दिन तक गर्भ में मृत बच्चे को लेकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही महिला को अंतत: रविवार देर रात इलाज मिल गया। अस्पताल प्रशासन के निर्देश पर गाइनी डिपार्टमेंट की डॉक्टर ने नॉर्मल डिलीवरी करवाकर मृत बच्चे को गर्भ से बाहर निकाल दिया। इसके बाद महिला के साथ ही उसके घरवालों ने राहत की सांस ली। फिलहाल महिला की स्थिति खतरे से बाहर है। इस घटना के बाद एक बार फिर सरकारी अस्पताल में मरीज के इलाज में लापरवाही बरते जाने की पुष्टि हुई है।
मामले की जानकारी होने पर अमर उजाला ने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से चर्चा की तब जाकर अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए पीड़ित महिला को तत्काल इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। वहीं पीड़ित महिला के भाई का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही और डॉक्टरों की अनदेखी के कारण उसकी बहन का बच्चा जन्म लेने से पहले ही दुनिया से चला गया।
बता दें कि सेक्टर-49 निवासी विवेक अपनी बहन निशा को प्रसव पीड़ा होने पर पर 10 अगस्त को जीएमएसएच-16 में लेकर पहुंचे थे। विवेक का आरोप है कि अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। विवेक ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के कारण 13 अगस्त को ही बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी अल्ट्रासाउंड तो कभी कोरोना व डेंगू टेस्ट के नाम पर उनकी बहन को इलाज देने में देरी की गई। इसके कारण बच्चे ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया। उसके बाद भी अस्पताल के डॉक्टरों के कान पर जूं नहीं रेंगा, जिस कारण उनकी बहन की जान पर बन आई। लापरवाही बरतते हुए 3 दिन तक मृत बच्चे को गर्भ से बाहर नहीं निकाला गया। विवेक का कहना है कि उन्हें इस बात का डर था कि कही उनकी बहन के साथ भी कोई अनदेखी न हो जाए। इसलिए इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन से कर मदद को गुहार लगाई थी।
मरीज का प्लेटलेट्स काउंट बहुत ही कम था, इसलिए उसे प्लेटलेट्स चढ़ाकर उसकी स्थिति में सुधार होने का इंतजार किया जा रहा था। उसका इलाज कहीं भी रोका नहीं गया था।
-डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच-16 चंडीगढ़