लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और पंजाब में सबकी नजर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के गठबंधन पर टिकी हुई है। दोनों दलों में समझौते की संभावना अब भी बरकरार है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने एक बार फिर कहा है कि शिअद से गठबंधन जरूरी है। अगर गठबंधन होता है तो निश्चित तौर पर सूबे की फिजा बदलेगी। इससे पंजाब में शहरी व ग्रामीण वोटों से समीकरण बदल सकते हैं। जाखड़ साफ कहते हैं कि हम सभी 13 सीटों के लिए तैयार हैं, लेकिन यह जमीनी स्तर पर जनता की भावना है कि गठबंधन होना चाहिए। जाखड़ ने क्षेत्रीय दलों को मजबूत करने की भी वकालत की है। उन्होंने कहा कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि क्षेत्रीय दलों को हर राज्य में मजबूत किया जाना चाहिए क्योंकि वे लोगों की आवाज हैं।
दरअसल, पिछले साल जालंधर लोकसभा उपचुनावों में अकाली दल को 1,58,445 वोट और भाजपा को 1,34,800 मत मिले थे। यानी अगर दोनों पार्टियों में गठबंधन हो जाता तो करीब तीन लाख वोट मिलने थे। आप के सांसद रिंकू को 3,02,279 वोट मिले थे। आप ने जालंधर उपचुनाव में 34.05 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें 2.5 प्रतिशत वोट मिले थे।
कांग्रेस का वोट शेयर घटकर 27.44 प्रतिशत हो गया जो 2019 में 37.9 प्रतिशत था। अकाली दल के लिए गठबंधन के बाद उलटा चुनौती पैदा होगी क्योंकि पंजाब के कई मुद्दे हैं, जिन पर केंद्र सरकार के साथ पंगा चल रहा है। इन विवादों को निपटाए बिना अकाली दल के लिए समझौता करना उल्टा दांव भी हो सकता है। वहीं माना जा रहा है कि चुनाव के नजदीक जाकर इस पर कोई बड़ा फैसला हो सकता है।
पंजाब के अहम मुद्दे
1- चंडीगढ़ पंजाब को सौंपना।
2- एसवाईएल का मुद्दा।
3- बीबीएमबी में अधिकारों का मुद्दा।
4- चंडीगढ़ में अधिकारियों की तैनाती का मामला।
5- किसानों को एमएसपी का मामला।
6- किसानों के ऊपर बैंक कर्ज की माफी का मामला।
7- बंदी सिंहों की रिहाई का मामला।
2019 लोकसभा चुनावों में किसको कितने प्रतिशत वोट
कांग्रेस: 40.12 फीसदी
शिअद: 27.45 फीसदी
भाजपा: 9.63 फीसदी