अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने यशपाल मलिक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने चेताया है कि मलिक जाटों को लेकर दिए गए विवादित बयान को लेकर माफी मांगें, नहीं तो फरवरी माह में उनके खिलाफ आंदोलन चलाया जाएगा। इसके लिए समिति खापों को भी एकजुट करके एलान किया जाएगा।
मंगलवार को प्रेस क्लब में हुई बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी समिति के राष्ट्रीय संयोजक अशोक बल्हारा ने दी। बल्हारा ने कहा कि बैठक में यशपाल मलिक के जसिया में दिए उस बयान की कड़ी निंदा की गई जिसमें उन्होंने जाट समाज के लोगों के लिए गुंडे, आतंकवादी और चाकू की नोक पर काम करवाने वाले जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
यशपाल मलिक पर सवाल उठाते हुए बल्हारा ने कहा कि मलिक ने पिछले 15 वर्षों में बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष हरियाणा की कौम को क्या दिया। इन वर्षों के दौरान 21 बच्चों की शहादत हुई और करीब 2200 मुकदमों से युवाओं का भविष्य खराब हुआ। मलिक ने कौम के करोड़ों रुपये बर्बाद किए। हरियाणा के जाट आज किसी भी श्रेणी में आरक्षित नहीं हैं। मलिक ने 20 मार्च 2017 को दिल्ली कूच से पहले हरियाणा के लोगों को साथ न लेकर खुद 18 मार्च की रात को सरकार से कौम का सौदा करने का घिनौना काम किया जिसे कौम कभी माफ नहीं करेगी।
मलिक की कार्यप्रणाली को देखते हुए 19 दिसंबर 2021 को हिसार में बड़ी पंचायत बुलाकर समिति से बाहर किया गया। बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से यशपाल मलिक द्वारा हिसार रोहतक इलाके में खापों व दूसरे संगठनों के बीच मतभेद कराने की साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही। बैठक में बलबीर चौधरी, राजस्थान से अरविंद चौधरी, दिल्ली से अश्विनी चौधरी, पंजाब से परमपाल, कमलजीत, धर्मवीर ढींढसा, किरपाल सिंह, राजकुमार, कैप्टन वेद प्रकाश, काशीराम, संतोष चेयरमैन, राष्ट्रीय प्रेस प्रवक्ता धर्मपाल वडाला आदि मौजूद रहे।
बैठक में ये प्रस्ताव पास
बैठक में जाट आंदोलन और किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने, जाटों को हरियाणा में बैकवर्ड क्लास और केंद्र में ओबीसी के तहत आरक्षण मिले, एमएसपी पर गारंटी कानून बने, पूंजीपतियों की तरह किसानों का कर्ज भी माफ हो, अग्निपथ, निजीकरण और मजदूर विरोधी कानून तुरंत प्रभाव से वापस लेने के प्रस्ताव पारित किए गए।