आईईडी भी एक तरह का बम ही होता है लेकिन यह मिलिट्री के बमों से कुछ अलग होता है। आतंकी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए करता है। ब्लास्ट होते ही मौके पर अक्सर आग लग जाती है, क्योंकि इसमें घातक और आग लगाने वाले केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। खासकर आतंकी सड़क के किनारे आईईडी को लगाते हैं, ताकि इसके पांव पड़ते या गाड़ी का पहिया चढ़ते ब्लास्ट हो जाता है।
आईईडी को ट्रिगर करने के लिए आतंकी रिमोट कंट्रोल, इंफ्रारेड या मैग्नेटिक ट्रिगर्स, प्रेशर-सेंसिटिव बार्स या ट्रिप वायर जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार इन्हें सड़क के किनारे तार की मदद से बिछाया जाता है। भारत में नक्सलियों द्वारा भी कई वारदातों को आईईडी ब्लास्ट के द्वारा अंजाम दिया गया है।
पुलिस अफसरों को सुरक्षा प्रबंधों की डेली रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश
केंद्रीय एजेंसियों के इनपुट के बाद सीमावर्ती जिलों के तमाम पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वह खुद सुरक्षा प्रबंधों और चेकिंग की समीक्षा करें और रोजाना इसकी रिपोर्ट तैयार की जाए। जिक्रयोग है कि पाक से आतंकी आ कर दो बार पंजाब में वारदात कर चुके हैं, जिसमें एक बार दीनानगर पुलिस थाने पर हमला किया था। इसमें एसपी बलजीत सिंह शहीद हो गए थे। जबकि दूसरी बार पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमला किया गया था।
गाजी के मारे जाने से बौखलाया है जैश
जैश-ए-मोहम्मद के टॉप ट्रेनर अब्दुल रशीद गाजी को भारतीय सेना ने मार गिराया था, जिस कारण जैश काफी बौखलाया हुआ है। गाजी पीओके में जैश के ट्रेनिंग कैंप का चीफ इंस्ट्रक्टर भी रह चुका है। जैश का कमांडर राशिद गाजी अफगानिस्तान में ट्रेड आईईडी एक्सपर्ट था और उसने काफी आतंकवादी इस फील्ड में ट्रेंड किए हैं। आत्मघाती हमला करने वाले आतंकी आदिल डार को गाजी ने ही तैयार किया था। गाजी जैश के आतंकियों हथियारों और विस्फोटकों की ट्रेनिंग देता था और उसके तैयार आतंकी भारत में घुसे हुए हैं।