आखिरकार श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने मान ही लिया कि डेरा सिरसा मुखी गुरमीत राम रहीम को माफी देना उनकी गलती थी। जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने यह खुलासा एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत के दौरान किया।
जत्थेदार ने कहा कि अगर एसजीपीसी कहेगी तो वह इस मामले में अपने पद से त्यागपत्र देने के लिए तैयार है। जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि डेरा मुखी को माफी नहीं दी गई थी, सिर्फ उनके माफी वाले पत्र को स्वीकार कर विचार करने के लिए रखा गया था।
उन्होंने कहा कि सिख संगत के रोष को देखते हुए माफीनामे वाले पत्र को भी डेरा मुखी को वापस कर दिया गया था।