सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर बादल
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कृषि विधेयक का मुद्दा बादल परिवार के गले की फांस बन गया है। मामला गर्माने के बाद बादल परिवार का केंद्र शासित भाईवाल पार्टी भाजपा के विरोध में जाकर बयान देना भी कोई काम न आया। वहीं हरसिमरत कौर बादल का केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने का पैंतरा भी कारगर साबित न हुआ। भाजपा कृषि विधेयकों को किसानों के हित में बता रही है, वहीं शिअद ने इसे किसान विरोधी बता भाजपा के साथ रिश्तों में और खटास पैदा कर ली है।
वहीं बादल परिवार को किसानों की सहानुभूति के बजाय ज्यादा रोष का सामना करना पड़ रहा है। किसान पिछले एक सप्ताह से बादल निवास के समक्ष पक्का मोर्चा लगाकर बादल परिवार को कोस दे रहे हैं। इस मुद्दे को भुनाने के लिए चढ़ाई गई बादल परिवार की दाल गली नहीं। हालात ऐसे बन गए कि किसानों के संघर्ष व नाराजगी के चलते बादल परिवार को गांव छोड़ना पड़ गया है। इसके बाद किसान संगठन बादल निवास के समक्ष धरने पर डटे हुए हैं।
बताते हैं कि कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इस मुद्दे के गर्माने के बाद से बालासर (हरियाणा) स्थित अपने फार्म हाउस में हैं। वहीं शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व हरसिमरत कौर बादल नई दिल्ली में हैं। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रदेश सचिव शिंगारा सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार ने किसानों के विरोध के बावजूद कृषि विधेयक पास कर दिया है। बादल परिवार भी महज दिखावे के लिए किसानों के समर्थन की बातें कर रहा है।
वह 25 सितंबर तक तो बादल निवास के समक्ष से बिल्कुल उठने वाले नहीं हैं। 25 सितंबर को पंजाब बंद का आह्वान है। तब तक केंद्र ने किसान हित में कोई फैसला न लिया तो वे संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएंगे। दिल्ली तक जाकर किसान संगठन केंद्र के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे। कुछेक किसान संगठन पंजाब में अगला एक्शन जारी रखेंगे।