डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह ने साध्वियों की सुरक्षा के लिए अच्छे-भले लोगों को नपुंसक बना दिया गया। इस बात का खुलासा डेरा के ही एक पूर्व साधु हंसराज चौहान ने किया। हंसराज चौहान का दावा है कि उसे भी डेरा के ही अस्पताल में ऑपरेशन करके नपुंसक बना दिया गया जिससे उसके हार्मोन में परिवर्तन आने पर उसमें शारीरिक बदलाव आ गया।
हंसराज चौहान ने 17 जुलाई 2012 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा डेरा प्रमुख ने उन जैसे करीब 400 युवाओं को ‘भगवान के दर्शन’ के नाम पर नपुंसक बनवाया। उन्होंने 166 लोगों की नाम सहित सूची भी सार्वजनिक की है।
हाईकोर्ट के आदेश पर शिकायतकर्ता हंसराज का चिकित्सीय परीक्षण भी हो चुका है जिसमें उसके अंडकोष ऑपरेशन द्वारा निकाले जाने की पुष्टि हुई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जस्टिस के. कानन ने प्रदेश सरकार को जांच के आदेश दिए थे।
सरकार को जांच के लिए एक माह का समय दिया गया था। 17 दिसंबर 2014 को सरकार ने जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी। सरकार के जवाब से असंतुष्ट न्यायाधीश ने कड़ी फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणियां कीं और 23 दिसंबर 2014 को इस मामले में की भी सीबीआई कौ सौंप दी।
डेरा सच्चा सौदा का विवादों से पुराना नाता
डेरा सच्चा सौदा विभिन्न प्रकार के विवादों से पुराना नाता रहा है। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां पर साध्वी यौन शोषण, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और रणजीत हत्याकांड का केस सीबीआई कोर्ट में विचाराधीन है।
अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को डेरा में साधुओं को नपुंसक बनाए जाने की जांच सीबीआई को सौंप दी। खास बात है कि चारों मामलों में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की जांच से असंतुष्ट होकर जांच सीबीआई को सौंपनी पड़ी।
साध्वी यौन शोषण से विवाद शुरू
डेरा सच्चा सौदा वर्ष मई 2002 से विवादों में आना शुरू हो गया था। मई 2002 को डेरा सच्चा सौदा में रहने वाली एक साध्वी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस व हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्रकर डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उस पर संज्ञान लेते हुए 24 सितंबर 2002 को सीबीआई को मामले की जांच सौंप दी। जांच के बाद सीबीआई ने डेरा मुखी पर यौन शोषण का केस दर्ज हुआ। बारह सालों से सीबीआई कोर्ट में साध्वी यौन शोषण का केस विचाराधीन है।
पत्रकार छत्रपति की हत्या
साध्वी यौन शोषण से संबंधित खबरों को लेकर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं ने 24 अक्तूबर 2002 को गालियां चलाईं। पत्रकार छत्रपति के शरीर में चार गोलियां लगी।
पुलिस चौकी के पास हुए इस हमले में दो हमलावरों को खैरपुर चौकी पुलिस ने दबोच लिया। गंभीर रूप से घायल रामचंद्र छत्रपति को सामान्य अस्पताल ले जाया गया। जहां से डॉक्टरों ने उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया।
कुछ दिन रोहतक पीजीआई में दाखिल रहने के बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां 21 नवंबर 2002 को छत्रपति की मौत हो गई। हत्या की साजिश का आरोप डेरा प्रमुख पर लगा और प्रदेश सरकार की जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने 10 नवंबर 2003 को डेरा पत्रकार छत्रपति व डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह हत्या की जांच सीबीआई के हवाले कर दी। सीबीआई ने डेरा मुखी पर एफआईआर दर्ज की और दोनों मामले सालों से पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में चल रहे हैं।
फकीर चंद मामले में डेरा मुखी पर एफआईआर
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 22 फरवरी 2010 को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर एफआईआर दर्ज की। इसके बाद 27 फरवरी 2010 को डेरा श्रद्धालुओं ने पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में बसों को आग लगानी शुरू कर दी। सिरसा जिले में तीन बसों को आग के हवाले कर दिया गया।
बहिष्कार का फरमान
मई 2007 को डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने पंजाब में अपने सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह की भांति पोशाक पहनी और पंच प्यारे की तरह ही डेरा प्रेमियों को जाम ए इंसा पिलाया। इससे सिखों में रोष फैल गया और पंजाब व हरियाणा में सिखों व डेरा प्रेमियों के बीच टकराव की शुरुआत हो गई।
दोनों पक्षों में हुई हिंसा के अंदर कई लोगों की जानें गईं। पंजाब के जिला बठिंडा में डेरा प्रमुख पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर 13 जुलाई 2007 में एफआईआर दर्ज की गई और श्री अकाल तख्त साहिब ने डेरा सच्चा सौदा का सामाजिक बहिष्कार करने का फरमान सुनाया।