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मौत और आधी सर्दी के बाद आई बेघरों की याद, पहले हटाए थे तंबू

Sat, 14 Jan 2017 12:53 AM IST
दीपक शाही /अमर उजाला, पंचकूला
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ठंड में उखाड़े तंबू - फोटो : अमर उजाला
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प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी सर्दी बिता दी। अब लगभग एक महीना शेष रहने के बाद प्रशासन को बेघरों की याद आई है। पंचकूला में बाकायदा अस्थायी रैन बसेरे बनाने के लिए जिला सचिवालय में शुक्रवार बैठक में इस पर चर्चा हुई और सिर्फ जगह चिह्नित की। 
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जबकि चंडीगढ़ में दिसंबर के पहले सप्ताह में ही प्रशासन ने रैन बसेरा बना दिया था। जब तक अस्थायी रैन बसेरा का निर्माण होगा तब तक शायद ठंड बीत जाए। बता दें कि ठंड से पंचकूला में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। 

बेघरों का आशियाना पंचकूला के फुटपाथ
सिर्फ श्री माता मनसा देवी मंदिर परिसर के अलावा शहर में रात्रि ठहराव के लिए पंचकूला में एक भी रैन बसेरा नहीं हैं। इसके चलते वर्तमान में बेघरों के आशियाना पंचकूला के फुटपाथ बन गए हैं। 
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वे पिछले ढाई माह से ठंड में फुटपाथ पर रात बिताने को मजबूर हैं। कई बेघरों को रात बारह बजे के बाद जब ठंड ज्यादा लगने लगती है तो वह रात बिताने के लिए पंचकूला के बस क्यू शेल्टर में चले जाते हैं। 
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अब कैसे आई प्रशासन को याद

ठंड में उखाड़े तंबू - फोटो : अमर उजाला
लेकिन चारों तरफ से शेल्टर खुला होने के चलते ठिठुरन नहीं जाती। इसके बाद बेघरों को सूर्योदय का इंतजार होता है कि कब सूर्य देव निकलें और वह ठंड से बचाव कर सकें।  

अधिकारियों को निर्देश 
रैन बसेरे के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीसी हेमा शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बेघरों के रात्रि ठहराव के लिए जगह सुनिश्चित करें और वहां पर उनके ठहरने की व्यवस्था करें। 

बैठक में निर्णय लिया गया कि सेक्टर-15 वृद्धाश्रम और सेक्टर-5 स्थित बस स्टैंड परिसर में अस्थायी रैन बसेरा बनाएं। इस बैठक में अधिकारियों द्वारा सुझाव दिया गया कि संबंधित क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी एक रोस्टर तैयार करना सुनिश्चित करें। उसके बाद संबंधित क्षेत्रों का रात्रि के समय निरीक्षण कर गरीब व बेघरों को इन रैन बसेरा में लाना सुनिश्चित करें। 

कुछ सवाल 
-प्रशासन को कुछ दिन शेष रहने पर ही बेघरों की याद क्यों आई।  
-बेघरों के रात्रि ठहराव के लिए ठंड की शुरुआत से पहले रैन बसेरे क्यों नहीं बने।
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