चंडीगढ़। मंथन आर्ट्स एंड थिएटर सोसाइटी की और से शनिवार को सेक्टर 18 स्थित टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में लेखक सत्यजीत राय और हीरा सिंह के निर्देशन में नाटक फटिक चंद का मंचन किया गया।
नाटक की कहानी एक 9 वर्ष के बच्चे बबलू पर केंद्रित है। वह शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखता है। एक दिन स्कूल जाते समय एक गिरोह उसका अपहरण कर लेता है ताकि उसके परिवार से फिरौती वसूली जा सके। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर होता है। भागने की कोशिश में हादसा हो जाता है जिससे बबलू के सिर में गंभीर चोट लगती है और वह अपनी याददाश्त खो बैठता है। अब वह न अपना नाम जानता है न पता और न ही परिवार के बारे में। इस अवस्था में वह मुंबई की भीड़-भाड़ वाली गलियों में भटकता है।
इसी दौरान उसकी मुलाकात होती है हारून अल रशीद उर्फ अरुण मुसाफिर नामक के एक सड़क पर जादू दिखाने वाले कलाकार से होती है। हारून भले ही निर्धन है, लेकिन दिल का बेहद नेक और सहानुभूतिपूर्ण इंसान है। वह बबलू को अपने साथ रखता है और उसे फटिक चन्द नाम देता है। वह उसे खाना, कपड़े और प्यार देता है और साथ ही अपने जादू के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए साथ रखने लगता है।
धीरे-धीरे फटिक और हारून के बीच एक भावनात्मक और सच्ची दोस्ती पनपती है। हारून को उसकी असलियत का कोई अंदाजा नहीं होता, दोनों एक-दूसरे के लिए संबल बन जाते हैं।
समय के साथ फटिक को अपने अतीत की झलकियां दिखने लगती हैं। कुछ यादें लौटने लगती हैं। इसी दौरान, हारून उसकी पूरी ईमानदारी से देखभाल करता है, चाहे उसके पास खुद कुछ भी न हो। दोनों की मुंबई की गलियों में जिंदगी चलने लगती है। अखबारों, पुलिस या अन्य माध्यमों से सुराग मिलते हैं और फटिक की असली पहचान उजागर होती है। वह अपने माता-पिता से एक बार फिर से वापस मिल जाता है।