लोकसभा चुनाव धीरे-धीरे प्रचार की तरफ बढ़ने लगे हैं। सभी पार्टियां अपने स्टार प्रचारकों को लेकर रणनीति बनाने लगी हैं। पंजाब में सभी 13 सीटों को लेकर तमाम राजनीतिक दलों में मंथन जारी है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शराब घोटाले में गिरफ्तार होने के बाद आम आदमी पार्टी में प्रचार की सारी जिम्मेदारी सीएम भगवंत मान पर आ गई है।
मालवा को संभालना बड़ी चुनौती
आप के लिए मालवा साख का सवाल है, क्योंकि उनके सर्वाधिक विधायक इसी क्षेत्र से हैं। लोकसभा की सबसे अधिक 7 सीटें भी इसी क्षेत्र से हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह क्षेत्र संगरूर भी इसी रीजन में आता है। वहीं, अन्य पार्टियां भी यहां पूरा दमखम लगा रहीं हैं।
कांग्रेस में पूर्व सीएम चन्नी को जालंधर से लोकसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी चल रही है। लिहाजा, उनका दायरा जालंधर लोकसभा सीट या दोआबा तक सिमट कर रह जाएगा। कांग्रेस के पास मालवा में कमान संभालने वाला कोई दमदार नेता नहीं है। मालवा में पहले सुनील जाखड़ कांग्रेस का हिस्सा थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह भी मालवा से थे और उनका खासा प्रभाव था। इस बार दोनों नेता भाजपा को लीड कर रहे हैं। हालांकि, मालवा में भाजपा को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है।
वहीं कांग्रेस के मुख्य वक्ता नवजोत सिंह सिद्धू ने क्रिकेट कमेंट्री का रुख कर लिया है। फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और नेता विपक्ष प्रताप बाजवा दोनों ही कांग्रेस के प्रचार को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन अगर हाईकमान अगर उन्हें प्रचार में उतारती है तो आप को उनसे भी निपटना होगा।
शिअद-भाजपा का गठबंधन हुआ तो आप के लिए बढ़ेगी चुनौती
अगर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन होता है तो आप के लिए चुनौती और बढ़ जाएगी, क्योंकि अभी तक तो शिअद के प्रचार का जिम्मा सुखबीर बादल के पास ही है, लेकिन दोनों पार्टियों के साथ होते ही भाजपा के केंद्रीय नेता और राज्य के अन्य बड़े नेता भी प्रचार में कूद पड़ेंगे, तब भगवंत मान को अकेले इनका सामना करना होगा। सुखदेव सिंह ढींडसा, परमिंदर ढींडसा, बीबी जगीर कौर को पार्टी में वापस लाकर सुखबीर को भी थोड़ी राहत मिली है।
माझा में बिक्रम मजीठिया ने मोर्चा संभाल रखा है, लेकिन वह अमृतसर हलके से बाहर नहीं निकल रहे हैं। वहीं, अगर भाजपा से समझौता हो जाता है तो शिअद-भाजपा गठबंधन के पास कई तेजतर्रार नेता हो जाएंगे। दोनों पार्टियों के नेता साथ दिख सकते हैं। भाजपा नेताओं में मीनाक्षी लेखी, अविनाश राय खन्ना, विजय रूपाणी दमदार चेहरे होंगे। खुद सुनील जाखड़ एक अच्छे वक्ता हैं।